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भारतीय वायुसेना (IAF) ने 11 मई 2025 को पुष्टि की कि पाकिस्तान-नियंत्रित क्षेत्रों में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाने वाले उसके वायु अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” की कार्रवाई अभी भी सक्रिय है, भले ही 10 मई 2025 को एक युद्धविराम समझौता हुआ हो। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, वायुसेना ने कहा कि उसने “सौंपे गए कार्यों को सफलता और पेशेवरता के साथ पूरा किया है” और अटकलों से बचने की अपील करते हुए वादा किया कि उचित समय पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
पृष्ठभूमि और समयरेखा
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद नई दिल्ली ने जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। 7 मई 2025 को भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ संदिग्ध आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। यह पहली बार था जब भारत ने इस क्षेत्र में सशस्त्र ड्रोन का उपयोग किया।
समयरेखा के अनुसार, 8 मई 2025 को वायुसेना ने पाकिस्तान के हमलों को रोकने के लिए अपनी S-400 “सुदर्शन” मिसाइल प्रणाली तैनात की और लाहौर के पास “शत्रु वायु रक्षा दबाव” (SEAD) मिशनों को अंजाम दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बाद में एक सर्वदलीय बैठक में बताया कि “कम से कम 100 आतंकवादी” मारे गए हैं और ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है।
ज़मीनी प्रभाव
नियंत्रण रेखा (LoC) के भारतीय हिस्से में पाकिस्तान की ओर से रुक-रुक कर गोलाबारी हुई, जिससे जम्मू और पंजाब के ज़िलों में बिजली गुल होने की घटनाएं सामने आईं।
तनाव के बीच एक हल्का-फुल्का पल
बढ़ते तनाव के बीच एक असामान्य घटना घटी जब एक भारतीय “लोइटरिंग म्यूनिशन” (उड़ता हुआ गोला-बारूद) गलती से रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में जा गिरा, जहां पाकिस्तान सुपर लीग का एक मैच शुरू होने वाला था। इससे एक आपातकालीन निकासी अभ्यास शुरू हो गया जिसने खिलाड़ियों और दर्शकों को कुछ क्षणों के लिए हंसा दिया।
प्रमुख व्यक्ति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस पूरे अभियान में राजनीतिक संप्रेषण का मुख्य चेहरा रहे हैं, जिन्होंने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया है। एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी वायुसेना की रणनीति की देखरेख कर रहे हैं और उन्होंने अपनी टीमों की “सोच-समझकर और गुप्त तरीके से” की गई कार्रवाइयों की सराहना की है।
कुछ कम जानी-पहचानी बातें
“सिंदूर” संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है कुमकुम या लाल रंग – इस अभियान में यह बलिदान और संकल्प का प्रतीक है। इस अभियान से पहले, वायुसेना ने कभी भी किसी वायु अभियान को युद्धविराम समझौते के बाद सार्वजनिक रूप से कोड नाम के तहत जारी रहने की पुष्टि नहीं की थी।
वर्तमान स्थिति और दृष्टिकोण
11 मई 2025 तक, वायुसेना के लड़ाकू विमान और ड्रोन पश्चिमी क्षेत्रों में “उच्च सतर्कता” पर तैनात हैं और किसी भी नई धमकी का जवाब देने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस्लामाबाद और नई दिल्ली दोनों ही पूर्ण युद्ध से बचना चाहते हैं लेकिन आगामी कदमों को लेकर सतर्क हैं।
संभावित विकास
वायुसेना द्वारा आगामी 48 से 72 घंटों के भीतर एक सार्वजनिक ब्रीफिंग की उम्मीद की जा रही है, जिसमें हमलों के लक्ष्यों, उपयोग किए गए हथियारों और ऑपरेशन के अंतिम उद्देश्य के बारे में जानकारी मिल सकती है। इस बीच, वाशिंगटन, लंदन और बीजिंग में राजनयिक माध्यमों से दोनों देशों पर तनाव कम करने का दबाव डाला जा रहा है।







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