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13 मई 2025 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन केलर नामक एक सटीक “सर्च एंड डेस्ट्रॉय” मिशन को अंजाम दिया, जो जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के शुकरो केलर क्षेत्र में चलाया गया। यह अभियान 7 मई को पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंक के ढांचों के खिलाफ हुए व्यापक ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू किया गया। ऑपरेशन केलर के दौरान तीन “कट्टर आतंकवादियों” ने सुरक्षाबलों पर भारी गोलीबारी की, लेकिन सभी मारे गए। इनमें शाहिद कुट्टे, एक टॉप लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कमांडर शामिल था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा हुआ था। मुठभेड़ स्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद—राइफल, ग्रेनेड, विस्फोटक आदि—बरामद किए गए, जो दक्षिण कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका है।
पृष्ठभूमि: 2025 का पहलगाम हमला
22 अप्रैल 2025 को पांच आतंकवादियों ने पहलगाम के बैसारण घाटी में पर्यटकों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई—जिनमें अधिकतर हिंदू पर्यटक थे, साथ में एक ईसाई आगंतुक भी शामिल था। आतंकियों ने AK-47 और M4 कार्बाइन से लैस होकर पुरुषों को महिलाओं से अलग किया, धर्म पूछे और फिर अंधाधुंध गोलीबारी की। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को भी उनके जीवनसाथी के सामने गोली मार दी। इस भीषण नरसंहार की जिम्मेदारी पहले द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो माना जाता है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की एक शाखा है। हालांकि, बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते TRF ने इससे इंकार कर दिया। यह हमला 2008 के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे बड़ा आतंकी हमला माना गया, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को तीव्र कर दिया।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकी शिविरों पर भारत का प्रहार
पहलगाम हमले के प्रत्यक्ष जवाब में भारतीय वायुसेना ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। इस अभियान में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों को सटीक मिसाइलों और बमों से निशाना बनाया गया। बाद में उपग्रह चित्रों से पुष्टि हुई कि पाकिस्तान के चार बड़े वायुसेना ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे ऑपरेशन की प्रभावशीलता स्पष्ट हुई। हमले विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालयों को निशाना बनाकर किए गए थे, जिससे सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने की पाकिस्तान की क्षमता को कमजोर किया गया।
ऑपरेशन केलर की शुरुआत और क्रियान्वयन
राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट से मिली सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर, भारतीय सेना ने 13 मई 2025 को दोपहर 12:50 बजे ऑपरेशन केलर की घोषणा की। जैसे ही सुरक्षा बलों ने घेराबंदी की, आतंकवादियों ने भारी गोलीबारी शुरू कर दी। ensuing मुठभेड़ में सभी तीन आतंकवादी मारे गए और किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा।
मुख्य विवरण
- मारे गए आतंकवादी: तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। इनमें प्रमुख नाम शाहिद कुट्टे और अदनान शफी शामिल हैं, जबकि तीसरे की पहचान नहीं हो पाई है।
- बरामद हथियार: कई राइफलें, ग्रेनेड, भारी मात्रा में गोला-बारूद, बैकपैक्स और आतंकियों के पर्स बरामद हुए, जिससे भविष्य की आतंकवादी योजनाओं को बड़ा झटका लगा।
- भूगोल: शोएकल केलर, जो श्रीनगर से लगभग 80 किमी दक्षिण में स्थित है, घने शुकरो जंगलों वाला क्षेत्र है और लंबे समय से आतंकियों का छिपने का गढ़ रहा है।
टॉप कमांडर: शाहिद कुट्टे
शाहिद कुट्टे, जो शोपियां के छोटीपोरा हीरपोरा का निवासी था, मार्च 2023 में आतंकी गतिविधियों में शामिल हुआ और लश्कर-ए-तैयबा के Category “A” कमांडर के रूप में उभरा। उसे पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है और वह कई खुफिया प्रयासों के बावजूद पकड़ से बाहर रहा। 26 अप्रैल को, पहलगाम हत्याकांड के कुछ दिन बाद, उसकी रिहाइश को सुरक्षा बलों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था।
ज़मीनी असर और समुदाय की प्रतिक्रिया
शोएकल केलर के स्थानीय ग्रामीणों ने दिन में गोलीबारी की आवाजें और भारी सेना की गतिविधियां देखीं, जिससे कई परिवार पास के बाग़ों में अस्थायी रूप से शरण लेने को मजबूर हुए। क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार, सेना की डॉग यूनिट, विशेषकर “शेरू” नामक जर्मन शेफर्ड, ने छिपे हथियारों की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उल्लेखनीय तथ्य और कम ज्ञात जानकारियाँ
- ऑपरेशन नामकरण: “सिंदूर” नाम नवविवाहिता के सिंदूर से प्रेरित है, जो हत्याकांड में विधवा हुई महिलाओं के लिए बदला दर्शाता है। “केलर” नाम शुकरो केलर क्षेत्र से लिया गया है।
- समय-संयोग: 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर और 13 मई को ऑपरेशन केलर का तेजी से निष्पादन, भारतीय सुरक्षा रणनीति में सटीकता और तालमेल को दर्शाता है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन केलर ने लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को दक्षिण कश्मीर में गंभीर झटका दिया है। एक टॉप कमांडर का सफाया और महत्वपूर्ण हथियारों की जब्ती इसके प्रमुख निष्कर्ष हैं। जब इसे ऑपरेशन सिंदूर के साथ देखा जाता है, तो यह भारत की नई और तेज़, सटीक आतंकवाद-रोधी रणनीति को दर्शाता है। हालांकि, यह हिंसा का चक्र यह भी दिखाता है कि क्षेत्र में शांति कितनी नाजुक है और आम नागरिकों को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।







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