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ULI क्या है?
यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) भारत का अगली पीढ़ी का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसे ऋणदाताओं (लेंडर्स) के लिए एक frictionless, सहमति-आधारित, API-ड्रिवन डेटा-शेयरिंग लेयर के रूप में लॉन्च किया गया है। इसे रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के साथ मिलकर तैयार किया है। ULI सरकारी विभागों, फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं के बीच की दीवारें तोड़ देता है। यह ऋणदाताओं को एक एकीकृत इंटरफेस के माध्यम से सत्यापित उधारकर्ता जानकारी तक पहुंचने में सक्षम बनाता है—जैसे आधार/KYC, भू-अभिलेख, GST/PAN, दुग्ध डेटा, सैटेलाइट इमेजरी, डिजीलॉकर और अकाउंट एग्रीगेटर फ्लो।
ULI कैसे ऋण स्वीकृतियों को तेज करता है
- प्लग-एंड-प्ले API: सिर्फ एक बार इंटीग्रेशन करने पर ऋणदाता कई महत्वपूर्ण डेटा स्रोतों को तुरंत एक्सेस कर सकते हैं।
- कागजी कार्रवाई और समय में भारी कमी: उधारकर्ताओं को अब मैन्युअली दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं। ऋणदाता डिजिटल तरीके से डेटा प्राप्त करते हैं, जिससे हफ्तों की प्रक्रिया कुछ ही दिनों या मिनटों में सिमट जाती है। उदाहरण के लिए, KCC ऋणों में 4–6 सप्ताह के बजाय ~10 मिनट लगते हैं।
- समृद्ध अंडरराइटिंग: वैकल्पिक और गैर-वित्तीय डेटा को मिलाकर ULI और अधिक स्मार्ट रिस्क निर्णय और व्यापक क्रेडिट पहुंच को संभव बनाता है।
सरकार और RBI का समर्थन
- अगस्त 2024: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने RBI@90 बेंगलुरु कार्यक्रम में ULI का अनावरण किया, इसे JAM और UPI के बाद अगला तार्किक कदम बताया।
- अगस्त 2023 से पायलट चरण: “Public Tech Platform for Frictionless Credit” के तहत पायलट शुरू हुआ। इसमें अब तक 27 ऋणदाता, 12 ऋण जर्नी, 54 API लाइव और 5 अकाउंट एग्रीगेटर इंटीग्रेटेड हो चुके हैं।
- जून 2025 की बड़ी पहल: सचिव एम नागराजू और डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर की सह-अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें इसे राज्यों और मंत्रालयों में व्यापक रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।
वास्तविक प्रभाव
- किसान (KCC): डिजिटाइज्ड भूमि और KYC डेटा से कागजी कार्रवाई के बिना घर-घर ऋण मिलना संभव हुआ।
- दुग्ध किसान: ऋणदाता अमूल जैसी फेडरेशनों से दूध उत्पादन और नकदी प्रवाह का डेटा लेकर उधारकर्ताओं की क्रेडिट योग्यता आंकते हैं।
- MSME: मिलिए सुजीत से, एक वस्त्र इकाई के मालिक—ULI ने उनके गायब GST और ROC दस्तावेज़ डिजिटल रूप से जुटाए, जिससे ऋण स्वीकृति तेजी से हुई।
भविष्य की संभावनाएं
- सीमलेस DPI इकोसिस्टम: ULI अकाउंट एग्रीगेटर (AA), ओपन क्रेडिट एनबलमेंट नेटवर्क (OCEN), डिजीलॉकर, ONDC के साथ इंटीग्रेट होकर एक सशक्त डिजिटल स्टैक बनाएगा।
- UI लेयर्स: अभी यह बैकएंड पर केंद्रित है, लेकिन भविष्य में उधारकर्ता के लिए डैशबोर्ड/वेब ऐप बनने की उम्मीद है।
- स्मार्ट लेंडिंग और को-लेंडिंग: AI आधारित अंडरराइटिंग, ब्लॉकचेन सत्यापन, को-लेंडिंग फ्रेमवर्क और डायनेमिक क्रेडिट मॉडल आने की संभावना है।
चुनौतियां और सुरक्षा उपाय
- प्राइवेसी और डेटा गुणवत्ता: भू-अभिलेखों में गलतियां हो सकती हैं और वैकल्पिक डेटा प्रोफाइलिंग का जोखिम ला सकता है। इसके लिए मजबूत सहमति, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र जरूरी है।
- गवर्नेंस गैप्स: डेटा की स्वामित्व, जवाबदेही, ऑडिट ट्रेल्स और रिड्रेस के स्पष्ट नियम बनाने होंगे, जैसे कि अकाउंट एग्रीगेटर (AA) मानदंड में हैं।
सामाजिक संदेश
ULI केवल एक तकनीक नहीं है—यह वित्तीय सशक्तिकरण का माध्यम है। इससे वंचित समुदायों के लिए फाइनेंस को frictionless बनाकर समावेशी विकास, राष्ट्रीय समृद्धि और विश्वास आधारित ऋण को बढ़ावा दिया जाएगा।
पूरा पृष्ठभूमि विवरण
- पारंपरिक ऋण की समस्याएं: बार-बार दस्तावेज़ बदलना, मैन्युअल सत्यापन, सीमित पहुंच, ऊंची लागत।
- DPI की पंक्ति: UPI (2016), JAM (जन-धन–आधार–मोबाइल), AA, OCEN। ULI इसी डिजिटल स्टैक की अगली कड़ी है।
- पायलट चरण: 2022–23 में KCC ऑटोमेशन से शुरू होकर अगस्त 2023 में पूरे ULI पायलट में विकसित हुआ।
- स्केलिंग का रोडमैप: सरकार और RBI राज्यों, मंत्रालयों और ऋणदाताओं में इंटीग्रेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
- आगे के कदम: व्यापक रोलआउट, ओवरले UI, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और नई ऋण श्रेणियों में विस्तार।







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