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एक शैडो इंडस्ट्री का उदय
साइबर धोखाधड़ी अब कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं रही; यह एक पूरी तरह से विकसित शैडो इंडस्ट्री बन गई है। हर दिन, अपराधी निर्दोष लोगों को धोखा देने के लिए नए-नए और चालाक तरीके ईजाद करते हैं, और कानून से हमेशा एक कदम आगे रहते हैं। तेलंगाना से लेकर चंडीगढ़ तक, भारत भर में हाल ही में हुई पुलिस की छापेमारी ने उनके शस्त्रागार में एक खतरनाक नए हथियार का खुलासा किया है: सिम बॉक्स। यह तकनीक, जो एक अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के केंद्र में है, यही वह तरीका है जिससे कंबोडिया या थाईलैंड में बैठा एक धोखेबाज़ आपको एक सामान्य भारतीय मोबाइल नंबर से कॉल कर सकता है। आइए, साइबर धोखाधड़ी की इस जटिल दुनिया को सरल शब्दों में समझें।
सिम बॉक्स फ्रॉड क्या है और यह कैसे काम करता है?
कल्पना कीजिए कि आप एक अंतरराष्ट्रीय कॉल करना चाहते हैं। आम तौर पर, आपकी कॉल एक कानूनी, लाइसेंस प्राप्त दूरसंचार नेटवर्क से होकर जाती है, जो महंगा हो सकता है। हालाँकि, धोखेबाजों ने एक शॉर्टकट ढूंढ लिया है।
- इंटरनेट कॉल: किसी दूसरे देश, मान लीजिए कंबोडिया में बैठा एक अपराधी, इंटरनेट का उपयोग करके एक कॉल करता है (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल, यानी वीओआईपी का उपयोग करके, जो व्हाट्सएप कॉल के समान है)। यह बहुत सस्ता है।
- “जादुई” बॉक्स: यह इंटरनेट कॉल भारत में एक विशेष उपकरण को भेजी जाती है जिसे सिम बॉक्स कहा जाता है। यह बॉक्स दर्जनों, कभी-कभी सैकड़ों, स्थानीय भारतीय सिम कार्डों से भरा होता है।
- लोकल स्विच: सिम बॉक्स इंटरनेट कॉल को लेता है और अंदर मौजूद स्थानीय सिम में से किसी एक का उपयोग करके इसे एक नियमित मोबाइल कॉल में बदल देता है।
- धोखा: जब आपका फोन बजता है, तो यह एक सामान्य भारतीय मोबाइल नंबर प्रदर्शित करता है, न कि कोई अंतरराष्ट्रीय नंबर। आपको पता ही नहीं चलता कि कॉल वास्तव में हजारों मील दूर से आ रही है।
यह पूरी प्रक्रिया आधिकारिक दूरसंचार गेटवे को दरकिनार करने का एक अवैध तरीका है, जो कॉल करने वाले की असली पहचान और स्थान को छुपाता है, और यह सब करते हुए उनके पैसे भी बचाता है।
“प्रौद्योगिकी-अपराध की होड़”
यह नई विधि उस चीज़ का एक आदर्श उदाहरण है जिसे विशेषज्ञ “प्रौद्योगिकी-अपराध की होड़” कहते हैं। जैसे ही सरकार और पुलिस धोखाधड़ी के एक तरीके को रोकते हैं, अपराधी तुरंत दूसरा तरीका ढूंढ लेते हैं। यह महसूस करते हुए कि लोग अब अंतरराष्ट्रीय नंबरों से सावधान हो रहे हैं, उन्होंने अपने स्कैम कॉल्स को स्थानीय और भरोसेमंद दिखाने के लिए सिम बॉक्स का उपयोग करना शुरू कर दिया।
सिम बॉक्स से होने वाले आम स्कैम्स
यह तकनीक आज हो रही कुछ सबसे डरावनी धोखाधड़ी को संभव बनाती है:
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम: धोखेबाज पुलिस या सीबीआई अधिकारी होने का नाटक करते हैं, यह दावा करते हैं कि आप किसी अपराध में शामिल हैं और जब तक आप एक मोटी रकम का भुगतान नहीं करते, तब तक आपको गिरफ्तार करने की धमकी देते हैं।
- बैंकिंग धोखाधड़ी: वे बैंक कर्मचारी बनकर आपको अपना ओटीपी, पिन या सीवीवी साझा करने के लिए बरगलाते हैं, और फिर आपका खाता खाली कर देते हैं।
- फर्जी ऑफर्स: वे पीड़ितों को अविश्वसनीय ऋण या निवेश प्रस्तावों का लालच देते हैं, जिसके लिए पहले एक “प्रोसेसिंग शुल्क” की आवश्यकता होती है, और फिर पैसे लेकर गायब हो जाते हैं।
- कस्टमर केयर स्कैम: वे आपकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी तक पहुंच प्राप्त करने के लिए लोकप्रिय कंपनियों के ग्राहक सेवा प्रतिनिधि का रूप धारण करते हैं।
सरकार की बड़ी कार्रवाई
भारत सरकार इस खतरे से सख्ती से निपट रही है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस खतरे से निपटने के लिए शक्तिशाली नए सिस्टम लॉन्च किए हैं।
- IISCPS सिस्टम: अक्टूबर 2024 में, सरकार ने ‘अंतर्राष्ट्रीय इनकमिंग स्पूफेड कॉल्स प्रिवेंशन सिस्टम’ लॉन्च किया। केवल पहले 24 घंटों में ही, इस सिस्टम ने 1.35 करोड़ ऐसी फर्जी कॉलों का सफलतापूर्वक पता लगाया और उन्हें ब्लॉक कर दिया!
- चक्षु पोर्टल: संचार साथी पहल के एक भाग के रूप में, यह ऑनलाइन पोर्टल आप जैसे नागरिकों को संदिग्ध मोबाइल नंबरों, धोखाधड़ी वाले संदेशों और स्पैम कॉलों की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है, जिससे अधिकारियों को इन अपराधियों को ट्रैक करने और ब्लैकलिस्ट करने में मदद मिलती है।
- पुलिस की छापेमारी: हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में साइबर क्राइम पुलिस बड़े पैमाने पर छापे मार रही है, रैकेट का भंडाफोड़ कर रही है और सैकड़ों सिम कार्ड और सिम बॉक्स जब्त कर रही है।
यह समस्या सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है। घाना से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक, विश्व स्तर पर इसी तरह के सिम बॉक्स धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया गया है, जो दर्शाता है कि यह एक विश्वव्यापी आपराधिक ऑपरेशन है जिसे हराने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
सामाजिक संदेश
इस डिजिटल युग में, हमारी सबसे बड़ी ढाल जागरूकता है। प्रौद्योगिकी का उपयोग अच्छे और बुरे दोनों के लिए किया जा सकता है। ये घोटाले कैसे काम करते हैं, यह समझकर हम खुद को और अपने प्रियजनों को सुरक्षित रहने के लिए सशक्त बनाते हैं। अनजान कॉल करने वालों से हमेशा सावधान रहें, चाहे उनका नंबर कितना भी स्थानीय क्यों न लगे। ओटीपी या पिन जैसी व्यक्तिगत जानकारी कभी साझा न करें। यदि कोई चीज़ सुनने में बहुत अच्छी लगती है, तो शायद वह सच नहीं है। आइए हम सब मिलकर काम करें, सूचित रहें, और सभी के लिए एक सुरक्षित डिजिटल भारत का निर्माण करें।







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