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22 जून 2025 की सुबह, एक हाई-स्टेक्स सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया, जिसका मकसद था ईरान के परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फहान—को निशाना बनाना। यह मिशन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर संचालित हुआ और इसमें सात B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स, 125 से अधिक विमानों, और एक पनडुब्बी द्वारा छोड़ी गई टॉमहॉक मिसाइलों का समन्वित उपयोग किया गया।
सटीकता, शक्ति और योजना
- इस ऑपरेशन की जान थी: 14 GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर (बंकर बस्टर) बमों का इस्तेमाल—जो कि युद्ध में पहली बार किया गया—फोर्डो और नतान्ज़ में गिराए गए।
- इसी समय, दो दर्जन से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें इस्फहान के सतही ठिकानों पर दागी गईं।
- हमले को छुपाने के लिए, डिकॉय B-2 विमानों को प्रशांत महासागर की ओर पश्चिम में भेजा गया, जबकि असली हमला दल पूर्व की ओर 18 घंटे की उड़ान पर गया, जिसमें हवाई ईंधन भराव भी शामिल था।
- अमेरिकी सेना ने इस हमले को एक “सर्जिकल, गैर-उत्तेजक” रणनीति बताया—जिसका उद्देश्य केवल परमाणु ढांचे को नुकसान पहुँचाना था, नागरिक या सैन्य हताहतों से बचते हुए।
आधिकारिक बयान
- रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस कार्रवाई को “साहसी और शानदार” बताया और कहा कि इसने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नष्ट कर दिया।
- जनरल डैन केन, जो जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष हैं, ने “गंभीर नुकसान” की पुष्टि की, लेकिन कहा कि अंतिम मूल्यांकन अभी बाकी हैं।
- उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने ऑपरेशन की “बेजोड़ समन्वय” के लिए प्रशंसा की।
ईरान की प्रतिक्रिया और वैश्विक असर
- ईरान ने हमले के प्रभाव को “सतही” बताया और दावा किया कि परमाणु सामग्री पहले ही दूसरी जगहों पर पहुंचा दी गई थी।
- IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) ने बताया कि सभी ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, लेकिन कहीं भी विकिरण स्तर नहीं बढ़ा।
- ईरान ने संभावित प्रतिशोध की बात कही और उसकी संसद ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने पर चर्चा की।
- इज़राइल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर डाल दिया, वहीं अमेरिका ने लेबनान से गैर-जरूरी दूतावास स्टाफ को वापस बुला लिया, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई।
क्यों है यह महत्वपूर्ण
- सैन्य उपलब्धि – यह अब तक का सबसे बड़ा B-2 मिशन था, 2001 के बाद सबसे लंबी बमवर्षक उड़ान, और बंकर बस्टर बमों का पहला वास्तविक प्रयोग।
- रणनीतिक संदेश – यह हमला ईरान को रोकने और अमेरिका की सैन्य दृढ़ता को दर्शाने के लिए था, बिना पूर्ण युद्ध शुरू किए।
- राजनीतिक नतीजे – आलोचकों ने इसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं: डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन्स का कहना है कि इस पर कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली गई।
- परमाणु कूटनीति पर खतरा – हालांकि इससे ईरान की परमाणु प्रगति को रोका जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान हथियारों की दिशा में और तेजी से बढ़ सकता है।







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