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6 जून 2025 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर इसे 5.5% कर दिया। यह इस वर्ष की लगातार तीसरी दर कटौती है। इसके साथ ही, कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में भी 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर इसे 3% किया गया है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में तरलता (liquidity) को बढ़ाना है। इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं और नियंत्रित मुद्रास्फीति के बीच आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है। RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ 6.5% और मुद्रास्फीति 3.7% रहने का अनुमान जताया है।
रेपो रेट और CRR को समझना
- रेपो रेट (Repo Rate): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण (loan) देता है। रेपो रेट में कटौती से उधारी की लागत घटती है, जिससे खर्च और निवेश को बढ़ावा मिलता है।
- कैश रिज़र्व रेशियो (CRR): बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास अनिवार्य रूप से जमा रखना होता है। CRR घटने से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- उधारकर्ता (Borrowers): ऋण पर ब्याज दरों में कमी आएगी, जिससे व्यक्तिगत और व्यावसायिक कर्ज लेना सस्ता होगा।
- निवेशक (Investors): शेयर बाजारों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, सेंसेक्स 747 अंक उछल गया, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
- बचतकर्ता (Savers): फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में संभावित गिरावट, जिससे जमा करने वालों को मिलने वाला रिटर्न घट सकता है।
विशेषज्ञों की राय
- उदय कोटक, अनुभवी बैंकर: उन्होंने RBI के निर्णय को “साहसी और रणनीतिक” बताया और इसके आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
- संजय मल्होत्रा, RBI गवर्नर: उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति का रुख अब ‘समायोजी (accommodative)’ से ‘तटस्थ (neutral)’ की ओर बदल दिया गया है, जो आने वाले समय में सतर्क दृष्टिकोण का संकेत है।
ऐतिहासिक संदर्भ
वर्तमान 5.5% रेपो रेट पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी गिरावट है, जो यह दर्शाता है कि RBI अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए कितना सक्रिय है। यह पिछले पांच वर्षों की सबसे बड़ी दर कटौती है, जो विकास को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता दिखाती है।
भविष्य की दिशा
हालांकि RBI ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, लेकिन ‘तटस्थ’ रुख अपनाने का मतलब है कि आगे दरों में कटौती की संभावना सीमित हो सकती है। केंद्रीय बैंक आने वाले समय में आर्थिक संकेतकों की बारीकी से निगरानी करेगा और उसी के अनुसार कदम उठाएगा।







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