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दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज से एक बेहद चिंताजनक सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है। आरोपियों में दो वर्तमान छात्र, एक पूर्व छात्र (जो संविदाकर्मी भी था) और एक सुरक्षा गार्ड शामिल हैं—कुल मिलाकर चार गिरफ्तारियां हुई हैं। इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। नीचे इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है।
घटना और गिरफ्तारियां
- 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की कानून की छात्रा का आरोप है कि 25 जून को कॉलेज परिसर में स्थित गार्ड के कमरे में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। आरोपियों में पूर्व छात्र मोनोजित मिश्रा, वर्तमान छात्र प्रमित मुखर्जी और ज़ैब अहमद, तथा सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी शामिल हैं।
- पुलिस का कहना है कि गार्ड ने आरोपियों के कहने पर अपनी ड्यूटी छोड़ दी और पीड़िता की चीखों की अनदेखी की—जिसके चलते 28 जून को उसे गिरफ्तार किया गया।
साक्ष्य और चिकित्सीय निष्कर्ष
- चिकित्सीय परीक्षण में घर्षण के निशान, दांतों के काटने के निशान, नाखूनों से खरोंच, और जबरन यौन संबंध बनाए जाने के प्रमाण मिले हैं।
- सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि दोपहर 3:30 बजे से रात 10:50 बजे तक पीड़िता को गार्ड रूम में ले जाया गया था—जिससे उसकी शिकायत की पुष्टि होती है।
जांच की प्रगति
- इस घटना की जांच एक सहायक आयुक्त के नेतृत्व में गठित एसआईटी कर रही है।
- 4 जुलाई को कोलकाता पुलिस ने कॉलेज में घटनास्थल का पुनः निर्माण किया। इसमें गार्डरूम, छात्र संघ कार्यालय, वॉशरूम जैसे मुख्य स्थान शामिल थे। चारों आरोपियों को सुबह ही घटनास्थल लाया गया और यह प्रक्रिया लगभग चार घंटे चली।
मोनोजित मिश्रा का प्रोफाइल
- मोनोजित मिश्रा उर्फ “मैंगो”, पूर्व टीएमसीपी (छात्र संगठन) नेता था, बाद में कॉलेज में संविदा कर्मचारी और अलीपुर कोर्ट में वकील बन गया।
- उसका रिकॉर्ड बेहद गंभीर है—उस पर पहले से कई एफआईआर दर्ज हैं, महिलाओं से छेड़खानी, स्टाफ को धमकी देना और शारीरिक हमलों के आरोप लगे हैं।
- उसने यह भी कबूल किया कि घटना का वीडियो बनाकर पीड़िता को डराने-धमकाने की योजना थी।
संस्थागत कार्रवाई
- साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज ने मोनोजित मिश्रा, ज़ैब अहमद और प्रमित मुखर्जी को कॉलेज से निष्कासित कर दिया। मिश्रा की संविदा नौकरी भी तत्काल समाप्त कर दी गई। साथ ही, उसका बार काउंसिल पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने कॉलेज प्रशासन और प्रबंधन समिति को आदेश दिया कि वे 10 जुलाई तक शपथपत्र और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें तथा कॉलेज का संविधान प्रस्तुत करें।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव
- पश्चिम बंगाल उच्च शिक्षा विभाग ने आरोपियों के निष्कासन या बहिष्कार का आदेश दिया है। एसआईटी करीब 17 छात्रों की संलिप्तता की जांच कर रही है।
- भाजपा ने इस घटना पर फैक्ट-फाइंडिंग दौरा और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। कुछ भाजपा नेताओं को हिरासत में भी लिया गया। तृणमूल कांग्रेस ने जवाब में कहा कि मोनोजित मिश्रा उनकी स्थानीय इकाई का सदस्य नहीं है।
जन आक्रोश और सुरक्षा की मांग
- छात्र और महिला समूहों ने सोशल मीडिया पर तेज़ विरोध दर्ज कराया, त्वरित न्याय, बेहतर छात्रावास सुरक्षा, और शून्य सहिष्णुता की मांग उठाई।
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले में औपचारिक रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य नाम और विवरण संक्षेप
- मोनोजित मिश्रा (“मैंगो”) – पूर्व छात्र, पूर्व टीएमसीपी नेता, कॉलेज में संविदा कर्मचारी। मुख्य आरोपी। घटना के वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप।
- ज़ैब अहमद (19 वर्ष) – वर्तमान प्रथम वर्ष का छात्र, सह-आरोपी। घटना के वीडियो में दिखा।
- प्रमित मुखर्जी (20 वर्ष) – वर्तमान द्वितीय वर्ष का छात्र, सह-आरोपी। वीडियो बनाने में शामिल।
- पिनाकी बनर्जी (55 वर्ष) – साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज का सुरक्षा गार्ड। आरोपियों को सहयोग देने और सूचना न देने के आरोप में गिरफ्तार।
- पीड़िता – 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की छात्रा। 25 जून को गार्डरूम में सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई। चिकित्सीय एवं सीसीटीवी साक्ष्य उसके बयान का समर्थन करते हैं।
आगे की कार्यवाही
- फॉरेंसिक विश्लेषण, सीसीटीवी व मोबाइल डेटा मिलान, गवाहों के बयान, गार्ड का संभावित रूप से सरकारी गवाह बनना, मेडिकल रिपोर्ट की कार्यवाही, और हाई कोर्ट के आदेशानुसार त्वरित सुनवाई की तैयारी।
- कलकत्ता हाई कोर्ट में 10 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है—कॉलेज को दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।
व्यापक संदर्भ
सांस्कृतिक दृष्टि से यह घटना हमें बंगाल की अन्य त्रासदियों की याद दिलाती है, जैसे 2014 का बीरभूम मामला और 2013 का कमदुनी मामला, जिनमें वर्षों तक न्याय में देरी हुई और राष्ट्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। यह नया उच्च-प्रोफ़ाइल कैंपस मामला छात्रावासों की सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
सामाजिक संदेश
यह घटना हमें चेतावनी देती है कि सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। संस्थानों को सख्त प्रोटोकॉल लागू करने चाहिए—आईडी चेक-इन, शिकायत तंत्र, नियमित सीसीटीवी ऑडिट, स्टाफ का प्रशिक्षण और पीड़िता के लिए सहायता प्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही समाज को पीड़ितों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, न कि दोषारोपण।







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