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6 मई 2025 को भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर हस्ताक्षर किए—यह ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन का इस तरह का पहला समझौता है। यह समझौता 2040 तक द्विपक्षीय व्यापार को सालाना £25 बिलियन से अधिक बढ़ाने का वादा करता है और वस्त्र, सेवाओं और गतिशीलता (mobility) के क्षेत्रों में संबंधों को सुदृढ़ करता है।
1. ऐतिहासिक समझौते का अवलोकन
यह समझौता औपचारिक रूप से नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान अनुमोदित किया गया। यह तीन साल से अधिक चली वार्ताओं का परिणाम है।
यह अनुमान लगाया गया है कि यह समझौता 2040 तक यूके की GDP को लगभग £4.8 बिलियन तक बढ़ा सकता है और 2024 में £42.6 बिलियन रहे द्विपक्षीय व्यापार को 2040 तक लगभग £68.1 बिलियन तक पहुँचा सकता है।
भारत अपनी 99% निर्यात वस्तुओं पर ब्रिटेन के लिए शुल्क समाप्त करेगा, जबकि ब्रिटेन भारत को अपने 90% निर्यात पर शुल्क घटाएगा।
2. पृष्ठभूमि और वार्ता की यात्रा
इस समझौते पर वार्ताएं जनवरी 2022 में शुरू हुई थीं और यह 15 दौरों तक चलीं, जिनमें भारतीय और ब्रिटिश चुनावों एवं G20 जैसे वैश्विक आयोजनों के कारण रुकावटें आईं।
प्रमुख विवाद के मुद्दों में शामिल थे:
- उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin)
- इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क
- स्कॉच व्हिस्की
- फार्मास्युटिकल उत्पादों
- सामाजिक सुरक्षा समन्वय
अप्रैल 2025 तक, 26 में से 25 अध्यायों पर सहमति बन चुकी थी और केवल कुछ अंतिम विवरणों को अंतिम रूप देना शेष था।
3. प्रमुख प्रावधान
3.1 शुल्क में कटौती
- विनिर्मित वस्तुएं (Manufactured Goods): ब्रिटिश कारों, मशीनरी और रसायनों पर लगने वाले शुल्क 7–10 वर्षों में धीरे-धीरे समाप्त किए जाएंगे।
- कृषि उत्पाद (Agricultural Products): भारत चावल और चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर कुछ सुरक्षा बनाए रखेगा, लेकिन दालों और कुछ मसालों पर शुल्क हटा देगा।
3.2 सेवाएं और गतिशीलता
- गतिशीलता वीजा (Mobility Visas): ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने के लिए भारतीय पेशेवरों (आईटी, स्वास्थ्य सेवा, वित्त) को हर साल 1,800 अतिरिक्त वीजा मिलेंगे। बदले में ब्रिटिश नागरिकों को भारत में इसी प्रकार की पहुंच मिलेगी।
- डिजिटल व्यापार (Digital Trade): डेटा फ्लो और ई-कॉमर्स पर उन्नत नियम बनाए गए हैं, हालांकि कुछ यूके टेक कंपनियों ने IP सुरक्षा को और मजबूत करने की मांग की थी।
3.3 क्षेत्रीय प्रभाव (Sectoral Impacts)
- व्हिस्की और शराब: स्कॉच और जिन पर शून्य शुल्क लागू होगा, जिससे Johnnie Walker और Fever-Tree जैसे ब्रांडों को लाभ होगा।
- ऑटोमोटिव: इलेक्ट्रिक वाहनों पर धीरे-धीरे शुल्क घटेगा; कुछ पारंपरिक कार पार्ट्स पर स्थानीय नौकरियों की सुरक्षा के लिए शुल्क बने रहेंगे।
- फैशन और वस्त्र उद्योग: यूके के लक्ज़री ब्रांड्स को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि भारतीय कपड़ा निर्यातक यूके के £1.2 बिलियन के बाजार को लक्षित करेंगे।
- फार्मास्युटिकल: कोई नई बौद्धिक संपदा (IP) प्रतिबद्धता नहीं की गई, जिससे नवप्रवर्तन कंपनियां निराश हैं; पेटेंट पर अलग से बातचीत जारी है।
4. जमीनी प्रभाव और कहानियां
मुंबई के धारावी बाजार में दुकानदार अब सस्ते ब्रिटिश चीज़ की उम्मीद कर रहे हैं जिसे मसालेदार भारतीय स्वादों के साथ जोड़ा जाएगा—और “चाय में चेडार” के मज़ाक पहले ही चलने लगे हैं।
वहीं, असम का एक छोटा चाय निर्यातक अब Darjeeling ब्लेंड्स के साथ Yorkshire Tea भी स्टॉक करने की योजना बना रहा है, और इसे “दोनों दुनियाओं का सर्वश्रेष्ठ मेल” कहता है।
5. हास्य की एक झलक
- लंदन के एक मछली विक्रेता ने मजाक किया कि “भारत से आयातित झींगे हमारे झींगों को पीछे छोड़ सकते हैं”—लेकिन फिर भी ब्रिटिश समुद्री भोजन को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए मुफ़्त सैंपल देने लगे।
- बेंगलुरु के एक स्टार्टअप ने मजाक किया कि वे जल्द ही अपने “चाय बनाने वाले इंटर्न्स” को यूके के कैफे में आउटसोर्स कर देंगे—उन्हें उम्मीद है कि वीजा परिवर्तन जल्द लागू होंगे।
6. प्रमुख व्यक्ति
- नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री
- कीर स्टारमर, यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री
- पीयूष गोयल, भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री
- जोनाथन रेनॉल्ड्स, यूके के व्यापार और उद्योग सचिव
- यवेट कूपर, यूके की गृह सचिव, जो वीजा नियमों के समानांतर वार्ताओं में भूमिका निभा रही हैं
7. संतुलित दृष्टिकोण
समर्थक कहते हैं कि यह FTA यूके के उपभोक्ताओं के लिए सस्ते सामान लाता है और भारतीय लघु एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) के लिए बाजार का विस्तार करता है।
आलोचक चेतावनी देते हैं कि अस्थायी श्रमिकों को राष्ट्रीय बीमा योगदान (NIC) से छूट देने से यूके को £100 मिलियन का राजस्व घाटा होगा और इससे घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा को नुकसान पहुँच सकता है।
फार्मा लॉबी अब भी मजबूत IP सुरक्षा की कमी को लेकर चिंतित है, जबकि दोनों देशों के किसान शुल्क शेड्यूल को करीब से देख रहे हैं।
8. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंध 1600 के दशक में ईस्ट इंडिया कंपनी के ज़माने से चले आ रहे हैं। ये संबंध औपनिवेशिक शासन के दौरान विकसित हुए और आजादी के बाद साझेदारियों के रूप में बदले।
ब्रेक्सिट के बाद 2020 में, यूके ने गैर-ईयू देशों के साथ बड़े FTA की खोज शुरू की; ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के साथ हुए पहले समझौतों ने भारत समझौते की नींव रखी।
9. भविष्य की रूपरेखा
दोनों देशों की संसदों में इस समझौते के अनुमोदन की उम्मीद मध्य 2026 तक है और इसे शुरुआत 2027 तक लागू किया जा सकता है।
द्विपक्षीय निवेश संधि (bilateral investment treaty) और सेवाओं के और गहन उदारीकरण पर बातचीत जारी रहेगी—विशेष रूप से वित्त और कानूनी क्षेत्रों को शामिल करते हुए।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे किसी प्रकार की कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए। पाठकों को कोई भी व्यावसायिक या निवेश निर्णय लेने से पहले योग्य पेशेवरों से परामर्श करना चाहिए। सभी आंकड़े और विवरण प्रकाशन की तिथि तक की स्थिति को दर्शाते हैं और इनमें बदलाव संभव है।







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