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एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव में, जिसका असर लाखों लोगों की जेब पर पड़ना तय है, केंद्र सरकार ने 1 फरवरी, 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह कदम ऐसे शुल्कों पर सात साल की रोक को समाप्त करता है, यह अवधि 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत के साथ शुरू हुई थी। आइए इस ज्वलंत मुद्दे की सभी परतों को खोलें और इसकी तह तक जाएं।
एक दहकती पृष्ठभूमि: जीएसटी से नए उत्पाद शुल्क तक
आज की खबर को समझने के लिए, हमें 2017 में वापस जाना होगा। जब जीएसटी व्यवस्था लागू की गई, तो इसने कई करों को सुव्यवस्थित किया। तंबाकू पर तत्कालीन उत्पाद शुल्क को काफी हद तक वापस ले लिया गया और उसकी जगह ‘मुआवजा उपकर’ (compensation cess) ने ले ली। हालांकि इसका लक्ष्य कर सरलीकरण था, लेकिन यह संरचना सात साल तक अपरिवर्तित रही।
अब, सरकार एक मजबूत, प्रभावी उत्पाद शुल्क घटक वापस ला रही है, जो तंबाकू जैसे ‘सिन गुड्स’ (हानिकारक वस्तुएं) पर कर लगाने के तरीके में एक बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि इन उत्पादों पर 40% की जीएसटी दर अपरिवर्तित बनी हुई है, लेकिन जीएसटी के ऊपर एक भारी, विशिष्ट उत्पाद शुल्क को फिर से लागू करना ही कीमतों को आसमान पर पहुंचाएगा।
क्या बदल रहा है? नए टैक्स की बारीकियां
सरल शब्दों में, सरकार की नई नीति ‘सबके लिए एक समान’ वाला दृष्टिकोण नहीं है। यह एक चतुर, बहु-स्तरीय कर संरचना है। नया उत्पाद शुल्क प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक पर लगाया जाएगा, और इसकी राशि दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:
- सिगरेट की लंबाई: सीधे शब्दों में, सिगरेट जितनी लंबी होगी, टैक्स उतना ही अधिक होगा।
- फिल्टर या गैर-फिल्टर: सिगरेट में फिल्टर है या नहीं, यह भी एक भूमिका निभाता है।
उत्पाद शुल्क अब ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 सिगरेट तक होगा, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि वे किस विशिष्ट श्रेणी में आते हैं।
इसी तरह की, मशीन-क्षमता आधारित उत्पाद शुल्क प्रणाली को चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा जैसे धूम्रपान रहित तंबाकू उत्पादों के लिए भी लागू किया जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि वे भी महंगे हो जाएं।
असली जलन: आपको कितना अधिक भुगतान करना होगा?
तो, आम आदमी के लिए इसका वास्तविक मतलब क्या है? इसका असर साफ तौर पर दिखेगा। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, हम खुदरा कीमतों में लगभग 15-20% की बढ़ोतरी देख रहे हैं।
- एक सिगरेट जिसकी कीमत अभी लगभग ₹18 प्रति स्टिक है, उसकी कीमत ₹21 से ₹22 के बीच होने की उम्मीद है।
- छोटी, गैर-फिल्टर सिगरेट (65 मिमी तक) पर लगभग ₹2.05 प्रति स्टिक का टैक्स लगेगा।
- लंबी, प्रीमियम सिगरेट (70-75 मिमी) पर लगभग ₹5.4 प्रति स्टिक का बहुत अधिक टैक्स लगेगा।
यह कदम निश्चित रूप से सिगरेट के एक मानक पैक को काफी महंगा बना देगा, जिससे नियमित धूम्रपान करने वालों के दैनिक बजट पर सबसे अधिक असर पड़ेगा।
यह बढ़ोतरी क्यों? सरकार का तीन-सूत्री एजेंडा
सरकार का यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, राजस्व आवश्यकताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के मिश्रण से प्रेरित है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य पहले: यह प्राथमिक उद्देश्य है। तंबाकू एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा है, जिससे भारत में हर साल अनुमानित 13 लाख मौतें होती हैं। यह विश्व स्तर पर माना जाता है कि कीमत बढ़ाना लोगों, विशेष रूप से युवाओं, पहली बार उपयोग करने वालों और कम आय वाले समूहों को धूम्रपान से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- खजाना भरना: चलिए आंकड़ों की बात करते हैं। तंबाकू उद्योग सरकार के राजस्व में सालाना ₹70,000 करोड़ से अधिक का योगदान देता है। यह उच्च कर संग्रह अन्य राजस्व हानियों की भरपाई करने, महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को निधि देने और तंबाकू विरोधी अभियानों का समर्थन करने में मदद करेगा।
- एक वैश्विक प्रतिबद्धता: भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (FCTC) का एक हस्ताक्षरकर्ता है। यह कर वृद्धि इस वैश्विक स्वास्थ्य संधि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है। दिलचस्प बात यह है कि डब्ल्यूएचओ सिफारिश करता है कि सिगरेट की खुदरा कीमत का कम से कम 75% टैक्स होना चाहिए। इस नई बढ़ोतरी के बावजूद, भारत का कुल टैक्स लगभग 53% होगा, जिससे भविष्य में और बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी रहती है।
संभावित जोखिम और एक चेतावनी
हालांकि यह कदम नेक इरादे से उठाया गया है, लेकिन इसके कुछ संभावित नकारात्मक पहलू भी हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे कुछ धूम्रपान करने वाले बीड़ी या खुली, अवैध सिगरेट जैसे सस्ते और अक्सर अधिक हानिकारक विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। यह तस्करी या नकली उत्पादों के लिए एक विस्तारित काले बाजार के जोखिम को भी खोलता है। सरकार के लिए चुनौती इन समानांतर बाजारों पर अंकुश लगाने के लिए प्रवर्तन को मजबूत करना होगा।
अंतिम विचार और सामाजिक संदेश
सरकार का यह साहसिक कदम एक स्पष्ट संकेत है: राष्ट्र का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। भले ही यह कई लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है, लेकिन इसका बड़ा लक्ष्य अगली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ, धूम्रपान-मुक्त भविष्य का निर्माण करना है। यह एक याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे प्रभावी बदलाव वे होते हैं जो हमें न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे समुदाय की भलाई के लिए अपनी आदतों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करते हैं। आखिर स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है जिसे हम प्राप्त कर सकते हैं।






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