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एक संक्षिप्त सलाह:
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) द्वारा 25 अप्रैल 2025 को जारी एक संक्षिप्त सलाह में UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2024 के नवचयनित टॉपर्स को यह याद दिलाया गया है कि एक सिविल सेवक के रूप में उनकी यात्रा उस क्षण से शुरू हो जाती है जब उन्हें सफल घोषित किया जाता है, न कि केवल तब जब वे प्रशिक्षण शुरू करते हैं। इस नोट में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक ऑनलाइन पोस्ट और ऑफलाइन आचरण सेवाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा को दर्शाते हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर कुछ भी साझा करने से पहले सावधानी और विचार आवश्यक है।
ईमानदारी और नैतिकता का आग्रह:
अभ्यर्थियों को सभी प्रकार के प्रलोभनों—उपहार, आतिथ्य, निःशुल्क प्रचार—को अस्वीकार करने की सलाह दी गई है ताकि वे अपनी निष्पक्षता की रक्षा कर सकें और किसी भी प्रकार की अनुचितता की धारणा से बच सकें। यह सलाह अकादमी के आदर्श वाक्य “शीलं परम भूषणम्” (चरित्र ही सर्वोत्तम अलंकरण है) पर आधारित है, और जीवन भर ईमानदारी, विनम्रता और नैतिकता को अपनाने की अपील करती है।
व्यावहारिक सुझावों में शामिल हैं:
- नागरिक शिष्टाचार (जैसे ट्रैफिक नियमों का पालन, थूकने से परहेज़)
- व्यक्तिगत स्वच्छता
- सादे और परिस्थिति के अनुकूल कपड़े पहनना
- समय की पाबंदी और सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने से परहेज़
तकनीक का जिम्मेदार उपयोग:
तकनीक के आधुनिक युग को ध्यान में रखते हुए, LBSNAA ने सेवा डिलीवरी के लिए एआई और डिजिटल टूल्स के नैतिक उपयोग को प्रोत्साहित किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर आत्म-प्रचार से बचने की भी चेतावनी दी है।
प्रशिक्षण की शुरुआत:
चयनित अभ्यर्थी शीघ्र ही मसूरी परिसर में 14-सप्ताह की फाउंडेशन कोर्स शुरू करेंगे, जिसकी अगुवाई उप निदेशक श्री शैलेश नवल करेंगे। यह कोर्स 29 नवंबर 2024 को समाप्त होगा। यह सलाह व्यक्तिगत रूप से निदेशक श्रीराम तरणिकांति द्वारा जारी की गई थी, जो LBSNAA की परंपरा और नवाचार के संतुलन के साथ नेताओं को गढ़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
UPSC CSE 2024 परिणाम:
यह परिणाम 22 अप्रैल 2025 को घोषित किया गया, जिसमें कुल 1,009 उम्मीदवारों की अनुशंसा की गई। शक्ति दुबे ने टॉप रैंक प्राप्त की।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
आचरण संबंधी दिशानिर्देशों का विकास:
LBSNAA में नैतिक मानदंडों को सिखाने की परंपरा दशकों पुरानी है, जो समय के साथ डिजिटल युग और सार्वजनिक जांच की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित हुई है। जहां पहले सिविल सेवक लो-प्रोफाइल रखते थे, वहीं हाल के वर्षों में ऑनलाइन आत्म-प्रचार में वृद्धि देखी गई है, जिससे अकादमी को संयम और शालीनता को फिर से सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस हुई।
यह सलाह इस समय क्यों जरूरी है:
आज के युग में एक ट्वीट भी वायरल हो सकता है, और औपचारिक प्रशिक्षण से पहले की किसी भी गलती से पूरा करियर प्रभावित हो सकता है। यह सलाह संभावित प्रतिष्ठा संबंधी जोखिमों को पहले से रोकने के उद्देश्य से जारी की गई है, ताकि भावी अधिकारी पहले दिन से ही जनविश्वास के आदर्शों को आत्मसात कर सकें।
सलाह के प्रमुख तत्व
1. ईमानदारी और प्रलोभन से दूरी:
- उपहार, आतिथ्य, मुफ्त प्रचार जैसे प्रलोभनों से दूरी बनाएं।
- वित्तीय सतर्कता रखें: हितों के टकराव से बचने के लिए खर्च और लाभों का स्पष्ट रिकॉर्ड बनाए रखें।
2. सोशल मीडिया आचरण:
- पोस्ट करने से पहले रुकें और सोचें—पुरानी सामग्री भी सेवा की छवि को प्रभावित कर सकती है।
- आत्म-प्रचार से बचें: व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग हतोत्साहित किया गया है।
3. व्यक्तिगत और सार्वजनिक शिष्टाचार:
- नागरिक शिष्टाचार अपनाएं: ट्रैफिक नियमों का पालन करें, कूड़ा न फैलाएं, स्वच्छता बनाए रखें।
- ड्रेस कोड: सादे और अवसर के अनुकूल कपड़े पहनें, जो सांस्कृतिक संवेदनशीलता को दर्शाएं।
- संयम और समय की पाबंदी: सार्वजनिक स्थानों पर नशे से बचें और दूसरों के समय का सम्मान करें।
जमीनी दृष्टिकोण
मसूरी में प्रशिक्षण जीवन:
प्रोबेशनर्स को शैक्षणिक सत्रों, शारीरिक प्रशिक्षण और फील्ड विज़िट्स की कठोर दिनचर्या से गुजरना होगा, जो मित्रता और सहनशीलता को बढ़ावा देती है। हिमालय की गोद में स्थित LBSNAA का हरा-भरा परिसर इस प्रशासनिक यात्रा के लिए प्रेरणा और चुनौती दोनों प्रदान करता है।
अनुभव और किस्से:
एक हल्के-फुल्के रिवाज़ के रूप में प्रशिक्षण के दौरान मेस हॉल में कराओके नाइट्स आयोजित होती हैं—पिछले साल एक बॉलीवुड क्लासिक की वायरल प्रस्तुति ने यह याद दिलाया कि अनुशासन और मज़ा एक साथ रह सकते हैं! पूर्व टॉपर्स “मिस्ट्री हाइक” को याद करते हैं जो सुबह-सुबह आयोजित होते हैं और जिनसे स्थायी रिश्ते बनते हैं।
संबंधित शाखाएं और प्रभाव
- कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT): परिणाम घोषित होने के बाद सेवा आवंटन की देखरेख करता है।
- अन्य सेवा अकादमियां: जैसे कि इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) और फॉरेन सर्विस इंस्टिट्यूट (IFS), आमतौर पर ऐसे ही दिशानिर्देश अपनाते हैं।
- नागरिक समाज और मीडिया निगरानी संस्थाएं: नियमों के अनुपालन पर निगरानी रखती हैं, जो सार्वजनिक जवाबदेही को रेखांकित करती है।







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