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10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर क्षेत्र में कई दिनों की तीव्र सीमा-पार झड़पों के बाद एक पूर्ण और तात्कालिक संघर्षविराम पर सहमति व्यक्त की। यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मध्यस्थता से हुआ, जिसमें सऊदी अरब और तुर्की ने सहायक भूमिका निभाई। यह युद्धविराम 22 अप्रैल को कश्मीर में भारतीय पर्यटकों पर हुए एक घातक आतंकवादी हमले के बाद आया, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को दोषी ठहराया। इसके जवाब में भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे दर्जनों नागरिकों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। हालांकि आधिकारिक संघर्षविराम की घोषणा हो चुकी थी, लेकिन जम्मू के पलांवाला सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर कुछ ही घंटों बाद उल्लंघन की खबरें सामने आईं।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
1949 का कराची समझौता
जुलाई 1949 में भारत और पाकिस्तान ने कराची समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत जम्मू और कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षण में एक संघर्षविराम रेखा (CFL) की स्थापना की गई। इस रेखा की निगरानी 1951 से संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) द्वारा की जाती है। यह समझौता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 39 (अप्रैल 1948) के तहत हुआ था, जिसका उद्देश्य 1947–48 के पहले भारत-पाक युद्ध को समाप्त करना था। इस समझौते में सैनिकों की स्थिति चिन्हित करने और उल्लंघनों की जांच के लिए प्रक्रिया तय की गई थी।
1965 का युद्ध और ताशकंद घोषणा
1965 का भारत-पाक युद्ध, पाकिस्तान की ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ के चलते शुरू हुआ, जिसमें बड़े पैमाने पर टैंक युद्ध हुए और यह युद्ध 17 दिनों तक चला। यह युद्ध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 211 (सितंबर 1965) और ताशकंद घोषणा (10 जनवरी 1966) के बाद समाप्त हुआ, जिसकी मध्यस्थता सोवियत संघ और अमेरिका ने की थी। इस समझौते में संघर्षविराम और सैनिकों की वापसी की बात कही गई थी।
2003 का संघर्षविराम समझौता
नवंबर 2003 में दोनों देशों ने नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम समझौते पर सहमति जताई, जिससे कश्मीर में बस और व्यापारिक संपर्क फिर से शुरू हुए। हालांकि 2017 के बाद से उल्लंघन की घटनाएं लगातार बढ़ती रहीं।
2025 की वृद्धि और संघर्षविराम
घटनाक्रम की शुरुआत
22 अप्रैल 2025 को, भारतीय प्रशासित कश्मीर के पहलगाम के पास भारतीय हिंदू पर्यटकों पर एक गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें एक दर्जन से अधिक नागरिक मारे गए। भारत ने इस हमले के लिए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया।
सैन्य कार्रवाई
भारत ने पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों पर मिसाइल हमले किए, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने “ऑपरेशन बुन्यान उल मरसूस” के तहत भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष में दोनों पक्षों में 50 से अधिक नागरिकों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए। सीमा क्षेत्र के गांवों और कस्बों में भारी बुनियादी ढांचे की क्षति हुई।
संघर्षविराम की घोषणा
10 मई 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो ने संघर्षविराम की घोषणा करते हुए कहा कि “दोनों पक्षों ने शांति बनाए रखने पर सहमति दी है, बशर्ते कि आगे कोई हमला न हो।” सऊदी अरब और तुर्की की द्वितीयक मध्यस्थता ने भी समझौते को मजबूती प्रदान की। इस्लामाबाद और नई दिल्ली दोनों ने कूटनीतिक संवाद फिर से शुरू करने की आशा जताई।
शर्तें, प्रमुख हस्तियां, और उल्लंघन
मुख्य हस्ताक्षरकर्ता
- भारत की ओर से: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और कहा कि जैसे ही सुरक्षा हालात सुधरेंगे, नागरिक उड़ानें बहाल की जाएंगी।
- पाकिस्तान की ओर से: सैन्य अभियानों के महानिदेशक (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल नजर अली और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने संघर्षविराम बनाए रखने की बात कही, लेकिन साथ ही किसी भी उल्लंघन पर “मुंहतोड़ जवाब” देने की चेतावनी भी दी।
प्रारंभिक उल्लंघन
- संघर्षविराम के कुछ ही घंटों बाद, जम्मू के पलांवाला सेक्टर में भारतीय चौकियों पर पाकिस्तान द्वारा गोलीबारी की खबरें आईं। इसके बाद भारतीय सीमा सुरक्षा बल को “पूरी ताकत से जवाब देने” का आदेश दिया गया।
- G7 देशों और चीन ने दोनों पक्षों से “संघर्षविराम की भावना और शब्दों” का पालन करने की अपील की ताकि पूर्ण युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।
ज़मीनी स्तर पर प्रभाव
नागरिकों की कठिनाइयाँ
- कश्मीर के कुपवाड़ा और बारामूला जिलों में ग्रामीणों ने बताया कि तोपखाने की गोलाबारी से उनके घर ध्वस्त हो गए और पशुधन मारे गए। राहत अभियान क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बाधित हो गए।
- श्रीनगर के पास फंसे ब्रिटिश नागरिकों ने लॉकडाउन जैसी स्थिति का वर्णन किया, जहाँ कुछ परिवारों को दवाओं की कमी का सामना करना पड़ा और निकासी मार्ग अवरुद्ध थे।
रोचक और कम ज्ञात तथ्य
- UNMOGIP, जो 1949 में स्थापित हुआ था, संयुक्त राष्ट्र के सबसे पुराने पर्यवेक्षक मिशनों में से एक है और 60 वर्षों से अधिक समय से CFL की निगरानी कर रहा है।
- सिंधु जल संधि, जो कभी औपचारिक रूप से निलंबित नहीं हुई, संघर्ष के बावजूद जल साझा करने का एक मॉडल बनी रही। हालांकि 2025 के संघर्ष के दौरान इस पर भी तनाव पैदा हुआ।







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