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सेवा के लिए समर्पित जीवन: डॉ. सूरी श्रीमति की दास्तान
कल्पना कीजिए कि आप एक क्लिनिक में जाते हैं और एक ऐसी डॉक्टर से मिलते हैं जो लगभग सात दशकों से इलाज कर रही हैं। यह समय में पीछे जाने जैसा लगता है। हैदराबाद के व्यस्त शहर में डॉ. सूरी श्रीमति नाम की एक अद्भुत महिला रहती हैं। उनकी उम्र 92 साल है, और वह सिर्फ एक डॉक्टर नहीं हैं। वह सहनशीलता और समर्पण की मिसाल हैं। जहां उनकी उम्र के ज्यादातर लोग घर पर आराम करते हैं, वहीं वह आज भी सर्जरी कर रही हैं और नई जिंदगियों को दुनिया में लाने में मदद कर रही हैं। उनका सफर किसी किंवदंती से कम नहीं है।
पीढ़ियों को जोड़ने वाला करियर
डॉ. सूरी श्रीमति ने 1958 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से अपनी एमबीबीएस की डिग्री पूरी की थी। सोचिए, तब से अब तक दुनिया कितनी बदल गई है। फिर भी, इतने वर्षों में, अपने पेशे के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। बाद में उन्होंने स्त्री रोग विज्ञान (गाइनेकोलॉजी) में विशेषज्ञता हासिल की। उनका काम इतना गहरा है कि उन्होंने एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों का इलाज किया है। कल्पना कीजिए कि किसी परिवार को उन पर कितना भरोसा होगा कि उन्होंने अपनी दादी, माँ और बच्चे के प्रसव के लिए उन्हीं सर्जन को चुना। वह इन लोगों के लिए सिर्फ एक सेवा प्रदाता नहीं हैं। वह उनके जीवन के इतिहास का हिस्सा हैं।
ऑपरेशन थिएटर में सटीकता
आप सोच सकते हैं कि क्या 92 साल की उम्र में कोई व्यक्ति ऑपरेशन थिएटर का दबाव झेल सकता है। इसका जवाब है एक जोरदार हाँ। उनके सहयोगी और परिवार के सदस्य अक्सर बताते हैं कि उनके हाथ कितने स्थिर हैं। चाहे वह सीजेरियन सेक्शन (ऑपरेशन से प्रसव) करना हो या कोई अन्य जटिल प्रक्रिया, उनकी सटीकता किसी भी युवा डॉक्टर के बराबर है। वह पुराने तरीकों पर निर्भर नहीं हैं। वह मेडिकल जर्नल पढ़कर, कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर और मेडिकल रिसर्च का अध्ययन करके अपने ज्ञान को हमेशा अपडेट रखती हैं। वह हमेशा सीख रही हैं।
स्वस्थ जीवन का रहस्य
लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि वह इतनी ऊर्जा के साथ कैसे काम कर पाती हैं। उनकी दिनचर्या ही उनकी जीवन शक्ति का आधार है। यह पूरी तरह से अनुशासन के बारे में है। उन्होंने अपने पिता से बचपन में योग सीखा था और वह आज भी इसका नियमित अभ्यास करती हैं। उनकी सुबह जल्दी ताजी हवा में प्राणायाम के साथ शुरू होती है। वह इस बात का भी पूरा ध्यान रखती हैं कि वह क्या खाती हैं। वह भुना हुआ या प्रोसेस्ड खाना नहीं खाती हैं, बल्कि ऐसा भोजन चुनती हैं जो आसानी से पच जाए और पोषक तत्वों से भरपूर हो। वह अपने स्वास्थ्य का श्रेय हल्के भोजन, भरपूर धूप और नियमित शारीरिक गतिविधि को देती हैं। वह उद्देश्य के साथ जीवन जीती हैं।
सेवा उन्मुख दृष्टिकोण
डॉ. सूरी श्रीमति के लिए चिकित्सा सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं है। यह उनका लक्ष्य है। वह अपने पेशे को एक मिशन की तरह मानती हैं। वह अक्सर देर रात तक काम करती हैं और वह किसी जरूरतमंद मरीज को ना नहीं कह सकतीं। हालांकि उन्होंने अपने पुराने अस्पताल के कर्तव्यों से संन्यास ले लिया है, लेकिन वह अपने घर से प्राइवेट प्रैक्टिस जारी रखती हैं। वह मरीजों को पैसा कमाने के साधन के रूप में नहीं देखतीं। वह उन्हें ऐसे इंसानों के रूप में देखती हैं जिन्हें मदद की जरूरत है। वह तब तक इस सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं जब तक उनके पास खड़े होने की ताकत है।
निस्वार्थ सेवा का सामाजिक संदेश
ऐसी दुनिया में जहां हम अक्सर जल्द रिटायरमेंट और व्यक्तिगत सुख की ओर भागते हैं, डॉ. सूरी श्रीमति हमें उद्देश्य की शक्ति की याद दिलाती हैं। वह हमें दिखाती हैं कि जब आपका दिल दूसरों की मदद करने के लिए तैयार हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है। हम सभी को वह एक चीज खोजने की कोशिश करनी चाहिए जो हमारे जीवन को खुद से परे अर्थ दे। जब हम अपनी ऊर्जा को अपने समुदाय की भलाई के लिए समर्पित करते हैं, तो हमें शक्ति का एक ऐसा स्रोत मिलता है जो हमें किसी भी चुनौती का सामना करने में मदद करता है। आइए हम उन वर्षों की परवाह किए बिना उपयोगी और दयालु बनने का प्रयास करें जो हमने जिए हैं।
कानूनी अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का गठन नहीं करती है। किसी भी चिकित्सीय स्थिति के बारे में आपके कोई भी प्रश्न हों, तो हमेशा अपने चिकित्सक या अन्य योग्य स्वास्थ्य प्रदाता की सलाह लें। यहां प्रस्तुत कहानियाँ सार्वजनिक रिपोर्टों और अवलोकनात्मक खातों पर आधारित हैं।






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