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वाशिंगटन डी.सी. – जब कोई शक्तिशाली नेता वाशिंगटन डी.सी. जैसी वैश्विक राजधानी की यात्रा करता है, तो वे आमतौर पर गर्मजोशी से स्वागत, हाथ मिलाने और महत्वपूर्ण बैठकों की उम्मीद करते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष (COAS), जनरल आसिम मुनीर के लिए, उनका हालिया पांच दिवसीय अमेरिकी दौरा कुछ अलग ही निकला। रेड कार्पेट की जगह, उनका स्वागत गुस्से भरे नारों की गूंज से हुआ, और ये नारे किसी दुश्मन के नहीं, बल्कि उनके अपने ही देशवासियों के थे।
वाशिंगटन में आखिर हुआ क्या?
जैसे ही जनरल मुनीर का बड़ा काफिला, जिसमें काली SUVs और आधिकारिक गाड़ियां शामिल थीं, वाशिंगटन डी.सी. के शानदार फोर सीजन्स होटल के सामने रुका, प्रदर्शनकारियों का एक समूह पहले से ही इंतज़ार कर रहा था। ये कोई आम प्रदर्शनकारी नहीं थे; ये पाकिस्तानी-अमेरिकी समुदाय के सदस्य थे, और उनमें से कई जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कट्टर समर्थक थे।
जैसे ही गाड़ियां पहुंचीं, हवा इन नारों से गूंज उठी:
- “शेम ऑन यू, आसिम मुनीर!” (तुम पर शर्म आती है, आसिम मुनीर!)
- “तानाशाह! शेम ऑन यू!”
- “पाकिस्तानियों का कसाई!”
- “फ्री पाकिस्तान!” (पाकिस्तान को आज़ाद करो!)
- “पाकिस्तान में नागरिक सर्वोच्चता!”
कुछ प्रदर्शनकारियों ने तो ऐसे पोस्टर और गाड़ियां भी रखी थीं, जिन पर सेना प्रमुख को “सामूहिक हत्यारा” (mass murderer) कहा गया था और नारा लिखा था, “जब बंदूकें बोलती हैं तो लोकतंत्र मर जाता है।” यह पूरी घटना, जो वीडियो में कैद हो गई, उस गहरे गुस्से और हताशा को दर्शाती है जो पाकिस्तानी प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा सैन्य प्रतिष्ठान के प्रति महसूस करता है। उन्होंने उनके काफिले का पीछा किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनकी आवाज सुनी जाए, और इस तरह एक हाई-प्रोफाइल राजनयिक दौरे को सार्वजनिक विरोध के तमाशे में बदल दिया।
अपमान की पृष्ठभूमि: फेक न्यूज़ वाले न्योते का fiasco
वाशिंगटन में हुआ यह सार्वजनिक अपमान कोई अकेली घटना नहीं है। यह जनरल मुनीर और उनकी टीम के लिए एक और बड़ी शर्मिंदगी के ठीक बाद हुआ है। कुछ हफ्ते पहले ही, पाकिस्तान में इस खबर को जोर-शोर से प्रचारित किया गया था कि जनरल मुनीर अमेरिका द्वारा अमेरिकी सशस्त्र बलों की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक विशेष सैन्य परेड में शामिल होने के लिए आमंत्रित एकमात्र विदेशी नेता हैं, जो डोनाल्ड ट्रम्प के जन्मदिन के साथ भी मेल खाती थी।
इस खबर को एक बहुत बड़ी राजनयिक जीत के रूप में पेश किया गया, जो विश्व मंच पर पाकिस्तान के अत्यधिक महत्व का संकेत था। हालांकि, यह कहानी जल्द ही बिखर गई। व्हाइट हाउस और अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इस बात से इनकार कर दिया कि ऐसा कोई विशेष निमंत्रण कभी भेजा ही गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम के लिए किसी भी विदेशी नेता को विशेष रूप से आमंत्रित नहीं किया गया था।
यह खुलासा, जिसकी रिपोर्ट सबसे पहले पाकिस्तानी समाचार पत्रों जैसे द डॉन ने की, एक बड़ा झटका था। यह ‘फेक न्यूज़’ का एक मामला लग रहा था, जिसे घर पर जनरल मुनीर की छवि को चमकाने के लिए बनाया गया था, लेकिन यह बुरी तरह से उल्टा पड़ गया, जिससे ऑनलाइन उनका खूब मजाक उड़ा। इस गलती पर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान को ट्रोल करने के लिए एक लोकप्रिय मीम का भी खूब इस्तेमाल हुआ, जिसमें एक बाल कलाकार को भ्रमित और निराश चेहरे के साथ दिखाया गया और साथ में लिखा था “रुकावट के लिए खेद है”।
वे इतने गुस्से में क्यों हैं? इमरान खान और नागरिक सर्वोच्चता का मामला
इस गुस्से की जड़ पाकिस्तान के गहरे राजनीतिक मतभेदों में छिपी है। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से इमरान खान की राजनीतिक पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थक हैं। उनका मानना है कि जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में सेना ने इमरान खान को सत्ता से हटाने की साजिश रची और अब उनकी पार्टी और समर्थकों पर गंभीर कार्रवाई कर रही है।
वे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को सेना द्वारा स्थापित एक “कठपुतली सरकार” के रूप में देखते हैं। उनके लिए, जनरल मुनीर एक राष्ट्रीय नायक नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने लोकतंत्र को कमजोर किया है। “नागरिक सर्वोच्चता” के नारे पाकिस्तानी राजनीति में सेना की शक्तिशाली और अक्सर आलोचना की जाने वाली भूमिका को समाप्त करने का सीधा आह्वान है। वे मांग कर रहे हैं कि अंतिम निर्णय चुनी हुई नागरिक सरकार का होना चाहिए, न कि सेना मुख्यालय का।
बड़ी तस्वीर: क्या पूर्व में मिल रहा है एक नया दोस्त?
एक तरफ जहाँ पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख को पश्चिम में ठंडे स्वागत और विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं एक दिलचस्प भू-राजनीतिक बदलाव हो रहा है। चीन, पाकिस्तान का “सदाबहार दोस्त”, न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि अपने क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के लिए भी अपना समर्थन बढ़ाता दिख रहा है।
लंबे समय तक, चीन ने जटिल वैश्विक संघर्षों में एक तटस्थ खिलाड़ी होने की छवि पेश करने की कोशिश की है। हालांकि, हाल की घटनाओं से रणनीति में बदलाव का संकेत मिलता है। चीन के विदेश मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में, एक बहुत ही रोचक बातचीत का विवरण दिया गया। चीन के शीर्ष राजनयिक, वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष, सैयद अब्बास अराघची से बात की।
इस बातचीत के दौरान, ईरानी अधिकारी ने “ईरान की स्थिति की निरंतर समझ और समर्थन” के लिए चीन को धन्यवाद दिया। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चीनी बयान में “इजरायल द्वारा ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की स्पष्ट रूप से निंदा” की गई।
यह एक बहुत बड़ा बयान है। खुले तौर पर इजरायल (एक प्रमुख अमेरिकी सहयोगी) की निंदा करके और ईरान का समर्थन करके, चीन एक स्पष्ट संदेश भेज रहा है। यह अपनी तरफ चुनने और अपने दोस्तों—जैसे ईरान और पाकिस्तान—का अधिक खुले तौर पर समर्थन करने की अपनी इच्छा दिखा रहा है, खासकर जब वे अमेरिका समर्थित देशों, जैसे इजरायल और भारत के साथ संघर्ष में हों। इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे पश्चिम के साथ पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, उसे बीजिंग में एक अधिक आत्मविश्वासी और मुखर समर्थक मिल रहा है।
अंत में, जनरल आसिम मुनीर का अमेरिका दौरा बिल्कुल भी सहज नहीं रहा। इसने पाकिस्तानी समुदाय के भीतर के गहरे गुस्से को उजागर किया है, नकली निमंत्रण कांड के बाद नई शर्मिंदगी लाई है, और वैश्विक राजनीति के उस जटिल जाल पर प्रकाश डाला है जहाँ राष्ट्र तेजी से अपनी तरफ चुन रहे हैं। पाकिस्तान के लोगों के लिए, यह विश्व मंच पर उनके आंतरिक संघर्षों के प्रदर्शन की एक दर्दनाक याद है।







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