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9 मई 2025 को, वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Morningstar DBRS ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को ‘BBB (लो)’ से बढ़ाकर ‘BBB’ कर दिया, साथ ही आउटलुक को स्थिर घोषित किया। यह उन्नयन भारत को निवेश-योग्य श्रेणी में और अधिक गहराई से स्थापित करता है। इस सुधार का आधार मजबूत आर्थिक मूलभूत संरचनाएं हैं—विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में सुदृढ़ निवेश, डिजिटल परिवर्तन, और राजकोषीय समेकन—साथ ही वित्तीय वर्ष 2022–25 के दौरान औसतन 8.2% की उच्च जीडीपी वृद्धि दर रही। ‘स्थिर आउटलुक’ यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में रेटिंग में कोई बदलाव अपेक्षित नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, इस उन्नयन से भारत के लिए उधारी की लागत में कमी आ सकती है, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है, और रुपये एवं घरेलू बांड बाजारों में विश्वास मजबूत हो सकता है।
भारत की संप्रभु रेटिंग का पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक यात्रा
- पूर्व रेटिंग: 15 मई 2024 तक Morningstar DBRS ने भारत को ‘BBB (लो)’ पर बनाए रखा था। मई 2023 में, S&P और Fitch जैसी एजेंसियों ने भारत को ‘BBB-‘ रेटिंग दी थी, जो सट्टा-ग्रेड सीमा से थोड़ा ऊपर थी।
- समान रेटिंग वाले देशों की तुलना: निवेश-ग्रेड देशों को सामान्यतः ‘BBB−’ या इससे उच्च रेटिंग प्राप्त होती है, जबकि ‘BBB−’ से नीचे की रेटिंग को सट्टा श्रेणी या “जंक” माना जाता है।
पूर्व चुनौतियां
- उच्च ऋण स्तर: फरवरी 2025 में Fitch के विश्लेषकों ने बताया कि भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 80% से अधिक था, जो ‘BBB’ श्रेणी के समकक्ष देशों की तुलना में अधिक है। साथ ही ब्याज-से-राजस्व अनुपात 25% था, जो एक महत्वपूर्ण बाधा रहा।
- राजकोषीय लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक समग्र सरकारी ऋण को जीडीपी के 50% के आसपास लाना है, जिससे राजकोषीय स्थिति को और मजबूत किया जा सके।
रेटिंग में उन्नयन का विवरण
आधिकारिक अधिसूचना
- एजेंसी और तिथि: Morningstar DBRS ने 9 मई 2025 को “Upgrades India to BBB, Trend Changed to Stable” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की।
- उन्नयन का दायरा:
- दीर्घकालिक रेटिंग: ‘BBB (लो)’ से बढ़ाकर ‘BBB’।
- अल्पकालिक रेटिंग: ‘R-2 (मिडल)’ से ‘R-2 (हाई)’।
- आउटलुक: ‘पॉजिटिव’ से परिवर्तित होकर ‘स्थिर’।
मुख्य कारण
- संरचनात्मक सुधार: सड़कों, बंदरगाहों, डिजिटल राजमार्गों जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से आर्थिक लचीलापन मजबूत हुआ।
- राजकोषीय समेकन: गिरते राजकोषीय घाटा अनुपात और लक्षित बजटीय उपायों ने भारत की वित्तीय विश्वसनीयता को बल दिया।
- उच्च वृद्धि दर: पिछले तीन वर्षों में लगभग 8.2% की निरंतर जीडीपी वृद्धि ने व्यापक स्थिरता सुनिश्चित की।
- बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति: अच्छी तरह से पूंजीकृत बैंकिंग प्रणाली और कम गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) ने वित्तीय स्थिरता में योगदान किया।
प्रभाव और विश्लेषण
सरकारी उधारी पर प्रभाव
- कम लागत: निवेश-ग्रेड उन्नयन के परिणामस्वरूप संप्रभु बांडों का स्प्रेड घटता है, जिससे नए बांड इश्यू पर ब्याज व्यय कम होता है।
- निवेशक विश्वास: वैश्विक कोष प्रबंधक आमतौर पर उच्च रेटिंग वाले देशों की ओर पूंजी पुनः आवंटित करते हैं, जिससे भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों की मांग में संभावित वृद्धि हो सकती है।
बाजार और रुपये पर प्रभाव
- रुपये को समर्थन: उच्च रेटिंग विदेशी निवेश प्रवाह को आकर्षित कर सकती है, जिससे रुपये की अस्थिरता पर नियंत्रण संभव है।
- इक्विटी बाजार: जोखिम की धारणा में कमी से घरेलू शेयर बाजार को बल मिल सकता है, क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारत में भागीदारी बढ़ सकती है।
व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
- कॉरपोरेट उधारी: भारतीय कंपनियों को सस्ती दरों पर ऋण प्राप्त हो सकता है, जिससे पूंजीगत व्यय और विस्तार योजनाओं को सहायता मिल सकती है।
- घरेलू प्रभाव: होमबायर्स और लघु-मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए ऋण दरों में हल्की कमी और बेहतर क्रेडिट पहुंच की संभावना बनती है।
जमीनी स्तर पर प्रतिक्रियाएं
- अर्थशास्त्री: राष्ट्रीय लोक वित्त संस्थान (National Institute of Public Finance) की डॉ. शालिनी मेनन ने कहा, “हालांकि यह उन्नयन उचित है, लेकिन एक और रेटिंग सुधार के लिए सुधारों को निरंतर बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा।”
ज्ञात और कम-ज्ञात तथ्य
- ज्ञात तथ्य: Morningstar DBRS रेटिंग निर्धारण में ‘लो’ और ‘हाई’ जैसे संशोधकों का प्रयोग करती है, जबकि Fitch और S&P ‘+’ / ‘−’ चिह्नों का उपयोग करते हैं।
- कम-ज्ञात तथ्य: Morningstar DBRS एकमात्र प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है जिसका मुख्यालय उत्तर अमेरिका में है, लेकिन यूरोप में भी इसकी सशक्त उपस्थिति है, जिससे इसे उभरते बाजारों पर एक विविध दृष्टिकोण प्राप्त होता है।
- अन्य एजेंसियों का परिदृश्य: वर्तमान में S&P भारत को ‘BBB−’ रेटिंग के साथ पॉजिटिव आउटलुक पर रखती है, जबकि Moody’s ने ‘Baa2’ रेटिंग के साथ स्थिर आउटलुक बनाए रखा है, जिससे अन्य एजेंसियों के साथ संभावित रेटिंग समरूपता की संभावना बनती है।







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