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3 मई 2025 की सुबह गोवा के उत्तर जिले के शिरगांव गांव स्थित श्री लैराई देवी मंदिर में एक दुखद भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। यह घटना उस समय हुई जब वार्षिक लैराई देवी जात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होने के लिए एकत्र हुए थे। चश्मदीदों के अनुसार, भगदड़ की शुरुआत तब हुई जब एक श्रद्धालु गलती से एक नीचे लटकते बल्ब को छू बैठा, जिससे उसे करंट लग गया और वह गिर पड़ा। इस दृश्य ने भीड़ में दहशत फैला दी और लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे। स्थानीय और राज्य प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को जांच पूरी होने तक स्थानांतरित कर दिया गया है।
घटना का सारांश
समय और स्थान
यह भगदड़ शनिवार, 3 मई 2025 को स्थानीय समयानुसार तड़के लगभग 3:00 बजे शिरगांव गांव के श्री लैराई देवी मंदिर में हुई। यह गांव गोवा की राजधानी पणजी से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। मंदिर परिसर और उससे सटे संकरे रास्तों में हजारों श्रद्धालु एकत्र थे, जिससे भीड़ क्षमता से कहीं अधिक हो गई थी।
मृतक और घायलों की संख्या
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार इस घटना में 6 लोगों की मौत हो गई है और 70 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए हैं। इनमें से कम से कम आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, म्हापसा ले जाया गया है। दर्जनों अन्य को प्राथमिक उपचार देकर पास के बिचोलिम और पणजी के अस्पतालों में भेजा गया।
भगदड़ का संभावित कारण
मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनानाथ गांवकर ने बताया कि एक श्रद्धालु की लाठी गलती से एक खुले बल्ब से टकरा गई, जिससे करंट लग गया और वह वहीं गिर पड़ा। यह हादसा इतनी घनी भीड़ में हुआ कि लोग घबरा गए और भगदड़ शुरू हो गई। उत्तर गोवा के पुलिस अधीक्षक अक्षत कौशल ने बताया कि करंट लगने की अफवाहों ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया।
प्रतिक्रिया और जांच
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए। यह जांच एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में की जाएगी। एहतियात के तौर पर उत्तर गोवा के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित पांच वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया और कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मौके पर चिकित्सा दल, अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा बलों को तुरंत तैनात किया गया। एम्बुलेंस पूरी रात घायलों को अस्पताल पहुंचाने में लगी रहीं।
पृष्ठभूमि: मंदिर और उत्सव
लैराई देवी मंदिर, जो स्थानीय देवी लैराई और उनके भाई-बहनों को समर्पित है, एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है और वहां तक पहुंचने के लिए संकरी और घुमावदार गलियों से गुजरना पड़ता है। वार्षिक लैराई देवी जात्रा, जिसे ढोंडाची जात्रा भी कहा जाता है, में श्रद्धालु नंगे पांव जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। इस धार्मिक आयोजन में हर साल लगभग 50,000 से 70,000 श्रद्धालु भाग लेते हैं, जिनमें गोवा और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक जैसे पड़ोसी राज्यों के लोग शामिल होते हैं।
भारत में भगदड़ों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत में धार्मिक आयोजनों के दौरान भगदड़ की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश में हुए महा कुंभ के दौरान भगदड़ में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी। जुलाई 2024 में हाथरस के एक धार्मिक शिविर में तंबू गिरने से 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। इन घटनाओं ने देशभर में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को लेकर चिंताएं और बहसें तेज कर दी हैं।
मानवीय पक्ष और चश्मदीदों की बातें
एक जीवित बचे श्रद्धालु प्रकाश नाइक (42) ने बताया कि उन्होंने तीन बच्चों को अपने शरीर से ढंककर बचाया, जब तक कि बचाव दल वहां नहीं पहुंच गया। वहीं एक अन्य श्रद्धालु मीरा देसाई ने हल्के-फुल्के अंदाज में बताया कि भगदड़ से कुछ ही क्षण पहले वह नारियल की भेंटों पर फिसल गईं और इसे उन्होंने “अपने जीवन का सबसे डरावना फिसलना” बताया। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि अचानक जयकारों और संगीत की आवाजें बंद हो गईं और उनकी जगह चीख-पुकार और अफरा-तफरी की आवाजें गूंजने लगीं।
निष्कर्ष
शिरगांव की यह दुखद घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि आध्यात्मिक आस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन कितना नाजुक होता है। प्रशासन को चाहिए कि वह पूर्व की घटनाओं से सबक लेकर रियल टाइम भीड़ निगरानी, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था और चौड़े मार्गों जैसी व्यवस्थाएं लागू करे। जब तक मजिस्ट्रेट जांच पूरी नहीं होती, तब तक पीड़ित परिवार जवाबों और जवाबदेही की प्रतीक्षा कर रहे हैं।







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