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जल जीवन मिशन (JJM), जिसे अगस्त 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हर ग्रामीण घर तक नल से साफ पीने का पानी पहुंचाने के लिए शुरू किया गया था, एक बार फिर खबरों में है। इसकी वजह है — सरकार द्वारा फंडिंग में भारी कटौती, रिकॉर्ड-तोड़ कवरेज उपलब्धियाँ, और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताएँ। हाल ही में सरकार ने इस मिशन के लिए केंद्र के हिस्से की फंडिंग में 46% की कटौती की है, जबकि अब तक 15.44 करोड़ ग्रामीण घरों (लगभग 80%) में नल से जल की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है। साथ ही, जमीनी स्तर पर “हर घर जल” प्रमाणन पाने वाले गाँव और नवाचारों के जरिए हुए सहयोग भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। यह लेख आपको जल जीवन मिशन की पृष्ठभूमि, ताज़ा घटनाक्रम, जमीनी प्रभाव, आने वाली चुनौतियों और रोचक कहानियों के माध्यम से सरल भाषा में सम्पूर्ण जानकारी देता है।
1. पृष्ठभूमि: जल जीवन मिशन क्या है?
1.1 शुरुआत और उद्देश्य
- शुरुआत: 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इसकी घोषणा की गई थी।
- लक्ष्य: हर ग्रामीण घर तक नल के माध्यम से प्रतिदिन 55 लीटर प्रति व्यक्ति शुद्ध पेयजल पहुँचाना, जो BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के मानकों पर खरा उतरता हो।
- संरचना: शुरूआत में यह ₹3.60 लाख करोड़ की योजना थी, जिसमें से ₹2.08 लाख करोड़ केंद्र सरकार और ₹1.52 लाख करोड़ राज्य सरकारें वहन करती थीं। वित्तीय हिस्सेदारी की दर: हिमालयी/पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 50:50।
1.2 अब तक की प्रगति
- कवरेज: 2019 में केवल 3.23 करोड़ घरों (17%) में नल कनेक्शन था, जो कि 1 फरवरी 2025 तक बढ़कर 15.44 करोड़ (79.74%) हो चुका है।
- प्रमाणित गाँव: 189 जिलों ने “हर घर जल” स्थिति प्राप्त कर ली है, जिनमें से 108 पूर्ण रूप से प्रमाणित हो चुके हैं। इसके अलावा 9.3 लाख स्कूलों और 9.7 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को भी नल कनेक्शन मिल चुका है।
2. यह अभी खबरों में क्यों है?
2.1 फंडिंग में कटौती
व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) ने जल जीवन मिशन के लिए 2028 तक केवल ₹1.51 लाख करोड़ देने की सिफारिश की है—जो कि जल शक्ति मंत्रालय की मांग से 46% कम है। इसकी वजह—खर्चों की अधिकता और कार्यान्वयन में देरी के चलते उठी चिंताएँ।
2.2 जल सुरक्षा पर ज़ोर
अनिश्चित मानसून, बढ़ते तापमान और भूजल की गिरती स्तर जैसी जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत अब दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर ज़ोर दे रहा है। अब मिशन का ध्यान मजबूत पाइपलाइन ढांचे और सामुदायिक भागीदारी पर केंद्रित है।
2.3 नीति विस्तार
मूल रूप से 2024 तक पूरा होने वाला मिशन अब केंद्र सरकार के बजट 2023–24 में 2028 तक बढ़ा दिया गया है, जो अंतिम छोर के घरों तक पहुंचने की जटिलता और पैमाने को दर्शाता है।
3. जमीनी प्रभाव और मानवीय कहानियाँ
3.1 एक दादी की राहत
उत्तर प्रदेश के एक गाँव में 78 वर्षीय शांति देवी ने जब पहली बार नल का पानी पिया जो मिट्टी जैसा नहीं था, तो उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे। “पहले हैंडपंप से पानी लाने में घंटे लगते थे, अब बच्चों को पढ़ा सकती हूँ,” वह मुस्कराते हुए कहती हैं।
3.2 पंचायत का गर्व
महाराष्ट्र के बीड़ जिले की ग्रामसभा ने “हर घर जल” की स्थिति की पुष्टि की और “जल महोत्सव” मनाया गया—जिसमें लोकगीतों के जरिए नल कनेक्शन की प्रशंसा की गई। यह परंपरा और नवाचार का सुंदर संगम था।
3.3 महिलाओं का सशक्तिकरण
इस योजना से ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों को दैनिक पानी लाने के श्रम से मुक्ति मिली है, जिससे स्कूल उपस्थिति में वृद्धि और घरेलू उद्यमों की शुरुआत हुई है—जैसे होम बेकरी और टेलरिंग यूनिट्स।
4. प्रमुख व्यक्ति और संस्थान
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत करने वाले।
- जल शक्ति मंत्री: श्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल (10 जून 2024 से)।
- स्थानीय पंचायतें और जल समितियाँ: ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन और रखरखाव की जिम्मेदारी।
- साझेदार संगठन: UNOPS (तकनीकी सहयोग), विभिन्न NGO, और निजी पाइप निर्माता—जो मजबूत बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करते हैं।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह
5.1 पाइपलाइन की टिकाऊ बनावट
ग्रामीण इलाकों की असमान भूमि और उच्च जलदाब जैसी स्थितियों के कारण HDPE और PVC पाइप आवश्यक हैं, जो रिसाव और जंग से बचाते हैं। इससे जल की बर्बादी और रखरखाव लागत में कमी आती है।
5.2 वित्तीय स्थिरता
फंडिंग में 46% कटौती के कारण लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है—जब तक कि राज्य सरकारें और समुदाय नकद, सामग्री या “श्रमदान” (स्वेच्छा से श्रम) के माध्यम से अपना योगदान न बढ़ाएं।
5.3 जल स्रोत की स्थिरता
अब JJM के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, ग्रे वाटर रीसाइक्लिंग, और जलभृत पुनर्भरण को हर स्रोत पर अनिवार्य किया गया है ताकि दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
6. मज़ेदार और कम-ज्ञात तथ्य
- जल उत्सव: कुछ गाँव हर साल “नल दिवस” मनाते हैं—नृत्य और पानी के साथ! यह एक अनोखा ग्रामीण त्योहार बन गया है।
- “टैप-ट्यून” गाने: बिहार के स्थानीय कलाकारों ने सुरक्षित जल पर रैप गीत बनाए हैं, जो क्षेत्रीय सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।
- पंचायत पुरस्कार: केरल की पहली ऑल-वुमन पंचायत ने 100% नल कवरेज के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, जिससे अन्य क्षेत्रों को प्रेरणा मिली।
7. निष्कर्ष
जैसे-जैसे जल जीवन मिशन अपने मध्य बिंदु की ओर बढ़ रहा है, महत्वाकांक्षी कवरेज लक्ष्यों को वित्तीय यथार्थ और स्थायित्व उपायों के साथ संतुलित करना अत्यंत आवश्यक है। लगभग 80% ग्रामीण घरों में सुरक्षित नल जल उपलब्ध हो चुका है—अब ध्यान फंडिंग सुनिश्चित करने, ढांचे को मजबूत बनाने, और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने पर है, ताकि “हर घर जल” वास्तव में भारत का जल-सुरक्षित भविष्य बन सके।







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