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सारांश
22 अप्रैल 2025 को जयपुर में एक हाई-प्रोफाइल भाषण में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भारत से आग्रह किया कि वह कुछ गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers – NTBs) को हटाए जो अमेरिकी कंपनियों की भारतीय बाजार तक पहुंच में रुकावट बनती हैं। वेंस ने इसे 2025 की शरद ऋतु तक एक व्यापक अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। यह वार्ताएं फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान शुरू हुई थीं, जिनका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 अरब तक दोगुना करना है। इस समझौते में ई-कॉमर्स, कृषि, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वेंस की यह अपील इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा चिंताओं के बीच अमेरिका की नई दिल्ली के साथ रणनीतिक सहयोग को गहराने की इच्छा को दर्शाती है, जबकि भारत अपने घरेलू उद्योगों, किसानों और लघु व्यवसायों पर संभावित प्रभाव को लेकर सतर्क है।
अमेरिका–भारत व्यापार वार्ताओं की पृष्ठभूमि
फरवरी 2025 व्हाइट हाउस शिखर सम्मेलन
प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिकी नेतृत्व से हुई पहली व्यक्तिगत मुलाकात का समापन दोनों देशों द्वारा औपचारिक व्यापार वार्ताएं शुरू करने के समझौते के साथ हुआ। इसमें वार्ता को दिशा देने के लिए “टर्म्स ऑफ रेफरेंस” को अंतिम रूप दिया गया।
व्यापार को दोगुना करने की महत्वाकांक्षा
इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य 2024 में लगभग $129 अरब के दो-तरफा व्यापार को 2030 तक $500 अरब से अधिक करना है, इसके लिए शुल्क और गैर-शुल्क दोनों प्रकार की बाधाओं को कम किया जाएगा।
गैर-शुल्क बाधाएं क्या होती हैं?
गैर-शुल्क बाधाएं वे नीतिगत उपाय होते हैं—जैसे कि कठोर गुणवत्ता मानक, आयात लाइसेंसिंग, और जटिल अनुपालन प्रक्रियाएं—जो सीधे कर नहीं लगाते, परंतु वस्तुओं के प्रवाह को गंभीर रूप से बाधित कर सकते हैं। जब ये उपाय वैज्ञानिक या सुरक्षा औचित्य से परे जाकर मनमाने हो जाते हैं, तो ये “गैर-शुल्क बाधाएं” कहलाते हैं, जो उच्च शुल्क के बराबर रुकावटें पैदा करते हैं।
वेंस की प्रमुख मांगें
- बाजार पहुंच: वेंस ने कहा, “भारत को अमेरिकी बाजार पहुंच के लिए कुछ गैर-शुल्क बाधाएं हटाने पर विचार करना चाहिए,” और इसे व्यापार ढांचे को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक बताया।
- ऊर्जा सहयोग: अमेरिका चाहता है कि वह भारत को किफायती, भरोसेमंद ऊर्जा—जैसे एलएनजी और पेट्रोकेमिकल्स—का निर्यात बढ़ाए और अपतटीय गैस अन्वेषण परियोजनाओं में सहयोग करे।
- रक्षा सहयोग: वेंस ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त सह-उत्पादन की योजना की घोषणा की और नई दिल्ली से और अधिक अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर खरीदने का आग्रह किया, इसे सुरक्षा और उद्योग दोनों के लिए लाभदायक बताया।
- हाई-टेक और महत्वपूर्ण खनिज: वाशिंगटन ने साफ-सुथरी ऊर्जा तकनीकों पर ज़ोर देते हुए अर्धचालक और बैटरी निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए भागीदारी की पेशकश की।
भारत में जमीनी प्रतिक्रिया
- लघु निर्माता: कुछ स्थानीय एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) मानकों के सरलीकरण का स्वागत करते हैं, लेकिन वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मूल्य प्रतिस्पर्धा के दबाव को लेकर चिंतित हैं।
- किसान और कृषि निर्यातक: तमिलनाडु और महाराष्ट्र के निर्यातक खाद्य वस्तुओं—जैसे मसाले और डेयरी—पर गैर-शुल्क बाधाओं में ढील से निर्यात में बढ़त की उम्मीद करते हैं, लेकिन गुणवत्ता ऑडिट को लेकर सतर्क हैं।
- ई-कॉमर्स कंपनियां: भारतीय स्टार्टअप खुले ऑनलाइन रिटेल बाजार में संभावनाएं देख रहे हैं, लेकिन यदि डेटा स्थानीयकरण मानदंडों में ढील दी गई तो अमेज़न और वॉलमार्ट जैसी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा की आशंका है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
- “टैरिफ किंग” उपाधि: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को कई बार “टैरिफ किंग” कहा था क्योंकि भारत की औसत आयात शुल्क दर 12% थी, जबकि अमेरिका की मात्र 2.2%।
- प्रतिशोधी शुल्क की धमकी: अप्रैल 2025 में अमेरिका ने चुनिंदा भारतीय वस्तुओं पर 27% “प्रतिशोधी शुल्क” लगाया, जिससे भारत पर बातचीत करने का दबाव बढ़ा और जवाबी कार्रवाई से बचा गया।
प्रमुख हस्तियां
- जे.डी. वेंस: भारत में कूटनीतिक प्रयासों का नेतृत्व कर रहे अमेरिका के उपराष्ट्रपति।
- नरेंद्र मोदी: संतुलित बाजार सुधारों की वकालत करने वाले भारत के प्रधानमंत्री।
- जेमी ग्रीयर: अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि, जिन्होंने 21 अप्रैल 2025 को वार्ता रूपरेखा को अंतिम रूप दिया।
- स्कॉट बेसेंट: अमेरिका के कोष सचिव, जिन्होंने भारत को प्राथमिक व्यापार भागीदार बताया।
आगे क्या?
दोनों सरकारों का लक्ष्य 2025 की शरद ऋतु तक प्रमुख वार्ता अध्यायों को पूरा करना है। एक सफल समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को फिर से आकार दे सकता है, स्वच्छ ऊर्जा पहलों को मजबूत कर सकता है और अमेरिका–भारत रणनीतिक साझेदारी को और भी प्रगाढ़ बना सकता है।







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