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भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2023–24 में एक उल्लेखनीय वित्तीय पुनरुत्थान किया है, जिसमें ₹2.56 लाख करोड़ की राजस्व आय पर ₹3,260 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया। यह दशकों में पहली बार लाभ में रहा साल है, जो मुख्यतः माल ढुलाई में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी (1,591 मिलियन टन तक) और कठोर लागत प्रबंधन उपायों के कारण संभव हुआ—जैसे कि विद्युतीकरण, ऊर्जा बचाने वाली तकनीकें, और कार्यबल का अनुकूलन। जबकि यात्री आय और स्टेशन आधुनिकीकरण ने लाभ में योगदान दिया, अधिकांश लाभ माल ढुलाई पहलों से आया—जिसमें निजी क्षेत्र की मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनलों और विशेष वैगनों में निवेश शामिल था। इसके परिणामस्वरूप माल राजस्व ₹1.13 लाख करोड़ (FY 2019–20) से बढ़कर ₹1.68 लाख करोड़ (FY 2023–24) हो गया। हालांकि, इस सफलता के साथ कुछ पुराने मुद्दे भी हैं—जैसे कि बढ़ती पेंशन देनदारियां, 90 प्रतिशत से अधिक का ऐतिहासिक रूप से उच्च ऑपरेटिंग अनुपात, और प्रमुख गलियारों पर अधूरी अधोसंरचना अपग्रेड। जैसे‐जैसे भारतीय रेलवे FY 2024–25 में 1.6 बिलियन टन माल परिवहन और नेटवर्क आधुनिकीकरण के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, इसका लाभकारी बनना आशा देता है—लेकिन यह निरंतर सुधारों और विवेकपूर्ण वित्तीय शासन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि: घाटे से लाभ की ओर
ऐतिहासिक ऑपरेटिंग अनुपात और वित्तीय चुनौतियाँ
2010 के दशक में अधिकांश समय तक भारतीय रेलवे घाटे में रहा, और ऑपरेटिंग अनुपात (यातायात आय की तुलना में कार्य खर्च का प्रतिशत) लगातार 90 प्रतिशत से ऊपर बना रहा। FY 2016–17 में ऑपरेटिंग अनुपात 96.5 प्रतिशत तक पहुंच गया—जो हाल के वर्षों का सबसे उच्चतम स्तर था—जिसका अर्थ है कि हर ₹100 की कमाई पर ₹96.50 खर्च किए जा रहे थे। FY 2021–22 में यह अनुपात और भी खराब होकर 107.39 प्रतिशत हो गया, जो अब तक का सबसे खराब स्तर है, यानी ₹100 की आय पर ₹107.39 खर्च किए जा रहे थे। उच्च स्टाफ और पेंशन लागत, लाभहीन यात्री किराए, और पुरानी अधोसंरचना इन घाटों के मुख्य कारण थे, जो वर्षों तक रेलवे की वास्तविक वित्तीय स्थिति को ढकते रहे।
नीतिगत पहल और प्रारंभिक सुधार
2016 से सरकार ने प्रीमियम ट्रेनों (शताब्दी, राजधानी, दुरंतो) पर “फ्लेक्सी-फेयर” सिस्टम लागू किया, और गति शक्ति मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल नीति शुरू की, जिससे माल ढुलाई की कार्यक्षमता बढ़ी। वैगनों और टर्मिनलों में निजी निवेश से राजस्व विविधता आई, हालांकि यात्री किराया युक्तिकरण कभी-कभी उल्टा असर डालता, जिससे सीटों की बुकिंग में गिरावट आई, परंतु राजस्व में समान वृद्धि नहीं हुई।
FY 2023–24 प्रदर्शन का अवलोकन
राजस्व और व्यय
मार्च 31, 2024 को समाप्त वित्त वर्ष में कुल राजस्व प्राप्तियाँ ₹2,56,093 करोड़ रहीं, जबकि राजस्व व्यय ₹2,52,834 करोड़ रहा—जिसके परिणामस्वरूप ₹3,260 करोड़ का शुद्ध अधिशेष (लाभ) हुआ। यह अधिशेष दशकों में भारतीय रेलवे का पहला शुद्ध लाभ है, जो FY 2023–24 में भारत की GDP में लगभग 1.5 प्रतिशत का योगदान देता है।
लाभ में प्रमुख योगदानकर्ता
- माल परिचालन: माल राजस्व में चार वर्षों में 48.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई—₹1.13 लाख करोड़ (FY 2019–20) से ₹1.68 लाख करोड़ (FY 2023–24) तक।
- यात्री सेवाएं: हालांकि अब भी सब्सिडी पर चलती हैं, फिर भी यात्री राजस्व FY 2024–25 के लिए अनुमानित ₹80,000 करोड़ है, जबकि FY 2024 में अक्टूबर तक यह ₹46,375 करोड़ था।
- गैर-किराया आय: विज्ञापन, पट्टे, खानपान सेवाएं, और पार्सल परिचालन जैसे माध्यमों से अतिरिक्त आय हुई, जिसने स्टाफ और पेंशन लागत में वृद्धि की भरपाई करने में मदद की।
माल क्रांति: लाभ का रीढ़
माल ढुलाई में वृद्धि
भारतीय रेलवे ने FY 2023–24 में 1,591 मिलियन टन माल ढोया—FY 2020–21 के 1,233 मिलियन टन से 29 प्रतिशत अधिक। कोयला, सीमेंट, स्टील, और ऑटोमोबाइल पार्ट्स प्रमुख कार्गो रहे, जिनमें सहायता मिली:
- गति शक्ति कार्गो टर्मिनल: सार्वजनिक‐निजी साझेदारियों से आधुनिक टर्मिनल बने, जिससे टर्नअराउंड समय घटा।
- विशेष वैगन: निजी कंपनियों ने विशेष वस्तु‐विशिष्ट वैगनों में निवेश किया, जिससे लोडिंग कार्यक्षमता बढ़ी।
- कार्गो एकत्रीकरण उत्पाद: “कार्गो एग्रीगेटर ट्रांसपोर्टेशन प्रोडक्ट” और “जॉइंट पार्सल प्रोडक्ट” जैसी योजनाओं ने छोटे शिपमेंट को सुव्यवस्थित किया।
भविष्य के माल ढुलाई लक्ष्य
रेल मंत्रालय का लक्ष्य FY 2024–25 में 1.6 बिलियन टन तक पहुंचना है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा माल परिवहनक बन सकता है।
लागत प्रबंधन और हरित पहल
- विद्युतीकरण: FY 2023–24 में डीजल पर अनुमानित ₹4,700 करोड़ की बचत हुई; रेलवे ने अपने नेटवर्क का 70 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण पूरा किया।
- हेड-ऑन-जेनरेशन (HOG) ट्रेनें: चुनिंदा मार्गों पर HOG तकनीक से कोचों को सीधे इंजन की ओवरहेड लाइन से ऊर्जा मिलती है, जिससे ईंधन और रखरखाव लागत में कटौती होती है।
- एलईडी लाइटिंग और नवीकरणीय ऊर्जा: स्टेशनों और कोचों में एलईडी लाइट लगाई गई, और छतों पर सोलर पैनल लगे—जिससे ऊर्जा बिल और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।
- हाइड्रोजन से चलने वाले प्रोटोटाइप: हाइड्रोजन ईंधन सेल इंजन का परीक्षण रेलवे की स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्थानीय प्रभाव और कहानियाँ
स्टेशन विक्रेताओं और स्थानीय व्यवसायों को यात्री संख्या में वृद्धि और तेज माल परिवहन से लाभ हुआ। नागपुर में, उन्नत स्टेशन पर पहले तिमाही लाभ की घोषणा के बाद पानी पुरी विक्रेताओं ने यात्रियों को मुफ्त गोलगप्पे बांटे—जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मुंबई–पुणे मार्ग पर छोटे स्टॉप्स पर लगाए गए हरित बेंच सेल्फी स्पॉट बन गए हैं, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री बढ़ी।
प्रमुख व्यक्तित्व और शासन
- अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री, को लोकसभा में रेलवे की वापसी के लिए प्रशंसा मिली। उन्होंने “दोहरा दृष्टिकोण”—राजस्व वृद्धि और खर्च नियंत्रण—को इसका श्रेय दिया।
- सुनीत शर्मा, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, ने नेटवर्क विद्युतीकरण और निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया।
- विभिन्न ज़ोनल रेलवे (जैसे पश्चिमी, पूर्वी, उत्तरी) के वरिष्ठ महाप्रबंधकों ने स्टेशन आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण अभियान को आगे बढ़ाया।
भविष्य की दिशा और शेष चुनौतियाँ
हालांकि लाभप्रदता एक मील का पत्थर है, भारतीय रेलवे को अब भी कई चुनौतियों का सामना करना है:
- पेंशन देनदारियां: वर्तमान और सेवानिवृत्त 1.3 मिलियन कर्मचारियों की पेंशन लागत सालाना ₹65,000 करोड़ है।
- ऑपरेटिंग अनुपात का दबाव: FY 2023–24 के लिए यह अनुमानित 98.7 प्रतिशत रहा—हालांकि सुधार हुआ, फिर भी आदर्श 90 प्रतिशत से ऊपर है।
- अधोसंरचना बैकलॉग: समर्पित माल गलियारे अब भी अधूरे हैं; सिग्नलिंग और पटरियों के नवीनीकरण के लिए निरंतर पूंजी निवेश जरूरी है।
आगे की सुधार योजनाएं—किराया युक्तिकरण, निजी निवेश का विस्तार, और तकनीक का लाभ—यह तय करेंगी कि यह लाभ एक सतत प्रवृत्ति बनेगा या केवल एक अस्थायी उपलब्धि।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और इसे केवल सूचनात्मक और पत्रकारिता उद्देश्यों के लिए समझा जाना चाहिए। यद्यपि सटीकता और तथ्यात्मकता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है, फिर भी लेखक या प्रकाशक किसी त्रुटि, चूक या इस जानकारी के उपयोग से उत्पन्न परिणामों के लिए कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेते। यह लेख किसी पेशेवर वित्तीय सलाह का स्थान नहीं लेता है। पाठकों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक रिपोर्टों का अध्ययन करें और किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले योग्य विशेषज्ञों से सलाह लें।







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