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सारांश
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के लोकप्रिय पर्यटन स्थल पहलगाम के पास स्थित बैसारन घास के मैदान में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस हमले में कम से कम 26 नागरिकों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए। यह पिछले एक दशक में पर्यटकों पर हुआ सबसे घातक हमला माना जा रहा है। इस हमले की जिम्मेदारी एक कम-ज्ञात संगठन “द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)” ने ली है, जिसे पाकिस्तान-स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस संगठन ने जनसंख्या बदलाव के आरोप लगाए हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना विदेश दौरा अधूरा छोड़कर वापस लौटते हुए न्याय का वादा किया, जबकि सुरक्षा बलों ने “ऑपरेशन टिक्का” शुरू करके कुछ ही घंटों में दो घुसपैठियों को मार गिराया। इस हमले ने कश्मीर की हालिया पर्यटन उछाल को झकझोर कर रख दिया है, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है, और 1947 से विवादित इस क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव को फिर से भड़का दिया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण
क्या हुआ
- तारीख और स्थान: 22 अप्रैल 2025 को लगभग दोपहर 2:50 बजे, 4 से 6 आतंकवादी निकटवर्ती जंगलों से निकलकर अनंतनाग जिले के पहलगाम के पास स्थित बैसारन घास के मैदान में पहुंचे। यह जगह केवल पैदल या टट्टू द्वारा पहुँची जा सकती है। वहाँ छुट्टियाँ मना रहे परिवारों पर आतंकियों ने अचानक गोलियां बरसाना शुरू कर दिया।
- हताहत: इस हमले में कम से कम 26 नागरिक मारे गए, जिनमें अधिकांश भारतीय पर्यटक थे। 17 अन्य घायल हुए, जिनमें एक नेपाली नागरिक और कर्नाटक के व्यवसायी मंजीनाथ राव (47) शामिल थे। उन्हें उनकी पत्नी पल्लवी और बेटे अभिजय के सामने गोली मारी गई।
- हमलावर: “कश्मीर रेजिस्टेंस” नामक एक नया आतंकवादी गुट ने हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बाहरी लोगों को कश्मीर में बसाकर जनसांख्यिकी परिवर्तन कर रही है।
तुरंत प्रभाव
- दहशत और पलायन: हमले की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। फ्लाइट्स तेजी से भर गईं, होटल खाली हो गए, और घरेलू तथा विदेशी पर्यटक कश्मीर के पर्यटन स्थलों से तेजी से पलायन करने लगे।
- सुरक्षा प्रतिक्रिया: हमले के कुछ ही घंटों में भारतीय सुरक्षा बलों ने “ऑपरेशन टिक्का” शुरू किया। बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा के पास घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया गया, जिसमें दो आतंकवादियों को मार गिराया गया। उनके पास से AK राइफलें, एक पिस्टल और एक आईईडी बरामद की गई। इसके बाद पूरे क्षेत्र में चेकपोस्ट्स, हवाई निगरानी, और नागरिकों की निकासी की प्रक्रिया शुरू हुई।
जमीनी सच्चाई और लोगों की आवाज़
पीड़ितों के अनुभव
कई बचे हुए पर्यटकों ने बताया कि आतंकवादी सैन्य जैसी वर्दी पहने हुए थे और उन्होंने गैर-मुस्लिमों की पहचान के लिए कलमा पढ़ने को कहा और खतना की जांच की। एक पर्यटक ने बताया, “उन्होंने एक महिला से कहा कि वह उसे इसलिए छोड़ रहे हैं ताकि वह मोदी को इस भयावहता के बारे में बता सके।”
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर असर:
- पर्यटन की तबाही: कश्मीर का पर्यटन उद्योग हाल ही में वर्षों की उथल-पुथल के बाद उबरना शुरू हुआ था। 2019 में विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद, सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30% पर्यटक आगमन में वृद्धि दर्ज की गई थी।
- व्यवसायों पर प्रभाव: होटल मालिक, टट्टू सेवाएं देने वाले और स्थानीय गाइड आजीविका से वंचित हो गए हैं। आगामी महीने की बुकिंग्स में 60% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
ऐतिहासिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि
कश्मीर की विवादित स्थिति
1947 के विभाजन के बाद से जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान दोनों अपना बताते हैं। इस मुद्दे पर कई युद्ध हो चुके हैं और दशकों से उग्रवाद जारी है। अगस्त 2019 में भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर क्षेत्र की अर्ध-स्वायत्तता समाप्त कर दी, जिससे नए सिरे से अशांति फैल गई।
हमलों का पैटर्न:
- पुलवामा (2019): जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में 40 भारतीय जवान शहीद हुए। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी।
- राजौरी (2023): आतंकवादियों ने आम नागरिकों के घरों में घुसकर 10 लोगों की हत्या कर दी थी।
यह नया हमला पर्यटन जैसे सामान्य जीवन के प्रतीकों को निशाना बनाकर शांति प्रयासों को विफल करने के आतंकवादी प्रयासों की श्रृंखला में एक और कड़ी है।
प्रमुख बयान और प्रतिक्रियाएं
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: उन्होंने सऊदी अरब का अपना विदेश दौरा बीच में छोड़ते हुए कहा कि “दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।”
- गृह मंत्री अमित शाह: श्रीनगर पहुँचे, सुरक्षा समीक्षा की और पीड़ित पर्यटकों के लिए एक हेल्पलाइन की घोषणा की।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: आतंकवाद के ठिकानों पर “निर्णायक कार्रवाई” की बात कही और सीमा पार कार्रवाई के संकेत दिए।
- विदेशी प्रतिक्रिया: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार करते हुए शोक संवेदना प्रकट की। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस हिंसा की निंदा की।







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